अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा युद्ध रोकने और ईरान के साथ बातचीत होने के दावे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरान की सरकार और शीर्ष नेताओं ने ट्रंप के बयान को पूरी तरह गलत बताते हुए इसे “फेक न्यूज” करार दिया है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian, संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने साफ कहा है कि अमेरिका के साथ किसी तरह की बातचीत नहीं हुई है और युद्धविराम को लेकर फैल रही खबरें भ्रामक हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया की स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका के दबाव के बाद युद्ध को कुछ दिनों के लिए रोका गया है और ईरान बातचीत के लिए तैयार है। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कई तरह की खबरें सामने आईं, लेकिन ईरान की तरफ से तुरंत इसका खंडन कर दिया गया।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की कूटनीतिक बातचीत नहीं हुई है और न ही युद्ध रोकने को लेकर कोई समझौता हुआ है। उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरें जानबूझकर फैलाई जा रही हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों और राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया जा सके।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी देश के सशस्त्र बलों की सराहना करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि देश का भविष्य जनता की एकता और सैनिकों के साहस पर निर्भर करता है। उनके इस बयान को ईरान की सख्त नीति का संकेत माना जा रहा है।
वहीं ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने ट्रंप के बयान को पूरी तरह फर्जी बताया। उन्होंने कहा कि ईरान के सभी अधिकारी सुप्रीम लीडर के नेतृत्व में एकजुट हैं और अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। गालिबाफ ने आरोप लगाया कि इस तरह की खबरें फैलाकर तेल और वित्तीय बाजारों में हेरफेर करने की कोशिश की जा रही है।
पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद गहरा गया है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
अमेरिका कई बार ईरान पर दबाव डाल चुका है कि वह समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखे, जबकि ईरान का कहना है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा। इसी बीच ट्रंप के बयान ने यह संकेत दिया था कि शायद बातचीत शुरू हो गई है, लेकिन ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी है और इसी कारण किसी भी बयान पर तुरंत विवाद खड़ा हो जाता है।
इस विवाद का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो सबसे पहले तेल की कीमतों पर असर पड़ता है। भारत जैसे देशों के लिए यह बड़ी चिंता की बात है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है।
तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है और इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। इसके अलावा खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बन जाती है।
भारत सरकार पहले भी कह चुकी है कि वह क्षेत्र में शांति चाहती है और किसी भी तरह के युद्ध से बचने की अपील करती है। इसलिए ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती भी बन सकता है।
ईरान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं हुई है और युद्ध रोकने की खबरें पूरी तरह गलत हैं। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि फेक न्यूज के जरिए तेल बाजार और वित्तीय बाजारों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
भारत में ईरानी दूतावास ने भी कहा कि ईरान की जनता हमलावरों को सख्त जवाब चाहती है और देश के सभी अधिकारी अपने नेता के साथ मजबूती से खड़े हैं। बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिका के साथ बातचीत की खबरों का कोई आधार नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का बयान घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है। अमेरिका में चुनावी माहौल के दौरान विदेश नीति से जुड़े बयान अक्सर राजनीतिक रणनीति का हिस्सा होते हैं।
दूसरी ओर ईरान अपनी सख्त छवि बनाए रखना चाहता है ताकि वह अपने समर्थकों को यह संदेश दे सके कि वह दबाव में नहीं आएगा। इसी वजह से ईरान ने तुरंत बयान जारी कर ट्रंप के दावे को खारिज किया।
यह भी माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उतार-चढ़ाव रोकने के लिए भी इस तरह के बयान दिए जाते हैं। जब युद्ध की आशंका बढ़ती है तो कीमतें बढ़ती हैं और जब बातचीत की खबर आती है तो बाजार शांत होता है।
ट्रंप के युद्ध रोकने के दावे और ईरान के खंडन ने यह साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी बनी हुई है। फिलहाल कोई ठोस बातचीत होती नजर नहीं आ रही और पश्चिम एशिया की स्थिति अब भी तनावपूर्ण है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह अमेरिका, ईरान और इजरायल के अगले कदम पर निर्भर करेगा। दुनिया के साथ-साथ भारत भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर पड़ सकता है।
Q1. ट्रंप ने क्या दावा किया था?
ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका के दबाव के बाद युद्ध कुछ दिनों के लिए रोका गया है और ईरान बातचीत के लिए तैयार है।
Q2. ईरान ने इस पर क्या कहा?
ईरान ने कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई और यह खबर फर्जी है।
Q3. मसूद पेजेशकियान ने क्या बयान दिया?
उन्होंने सशस्त्र बलों की सराहना की और कहा कि देश की सुरक्षा से समझौता नहीं होगा।
Q4. भारत पर इसका क्या असर हो सकता है?
तेल की कीमत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई बढ़ेगी और भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।
Q5. क्या युद्ध का खतरा अभी भी बना हुआ है?
हाँ, तनाव जारी है और हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।
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