मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान, अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच ईरान के वॉटर प्लांट पर हमले की खबरों ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पहली बार ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की, लेकिन यूएई ने इस आरोप को साफ तौर पर खारिज कर दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली पोर्टल Ynet ने दावा किया कि यूएई की एयरफोर्स ने ईरान के एक महत्वपूर्ण वाटर प्लांट को निशाना बनाया। कहा गया कि यह हमला ईरान की सबसे बड़ी कमजोरी यानी पानी की सप्लाई चेन पर किया गया, क्योंकि ईरान के कई तटीय और रेगिस्तानी इलाकों में पीने का पानी डिसेलिनेशन प्लांट्स पर निर्भर करता है। ऐसे प्लांट्स को नुकसान पहुंचने से आम लोगों और सेना दोनों के लिए संकट पैदा हो सकता है।
हालांकि, यूएई सरकार ने बयान जारी कर कहा कि उसने किसी भी नागरिक सुविधा या वॉटर प्लांट पर हमला नहीं किया है और वह आम जनता को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं है।
इसी बीच ईरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिकी हमले के कारण देश के लगभग 30 गांवों में पानी की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत को निशाना बनाना युद्ध अपराध जैसा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में स्थित एक वाटर प्लांट पर ड्रोन हमला किया था। इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।
उधर यूएई ने बताया कि अब तक उस पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन से हमले किए जा चुके हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हाल के हमलों में कई बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया, जबकि कुछ समुद्र में गिर गए।
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यूएई इस युद्ध में खुलकर शामिल होता है, तो वह नागरिक ठिकानों के बजाय केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा, ताकि मानवीय संकट न पैदा हो।
मिडिल ईस्ट में जारी इस संघर्ष के बीच पानी, तेल और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमले को बेहद खतरनाक माना जा रहा है, क्योंकि इससे आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।
ईरान की पानी सप्लाई पर हमले की खबरों से मचा हड़कंप, UAE ने किया इनकार, अमेरिका पर 30 गांवों को प्यासा करने का आरोप