शिक्षा मंत्री के गृह जिले में 1 करोड़ का स्कूल तीन साल में जर्जर, दीवारों में दरारें और टपकती छत से खतरे में छात्र

शिक्षा मंत्री के गृह जिले में 1 करोड़ का स्कूल तीन साल में जर्जर, दीवारों में दरारें और टपकती छत से खतरे में छात्र
February 23, 2026 at 1:37 pm

नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री के गृह जिले नरसिंहपुर से सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। जिले के आमगांव बड़ा में लगभग 1 करोड़ रुपये की लागत से तीन वर्ष पहले निर्मित नवीन शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक स्कूल भवन अब जर्जर हालत में पहुंच गया है।

बाहर से आकर्षक दिखने वाली यह इमारत अंदर से खस्ताहाल है। दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं, बरसात के दौरान छत से पानी टपकता है और फर्श की टाइल्स उखड़ने लगी हैं। ऐसे हालात में पढ़ाई कर रहे छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

दीवारों में दरारें, छत से रिसाव और गंदा पानी

स्कूल परिसर के अंदर हालात चिंताजनक हैं। कई कक्षाओं की दीवारों में क्रैक साफ दिखाई दे रहे हैं। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकने के कारण फर्श गीला हो जाता है, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।

आईसीटी लैब में रखे कंप्यूटरों को बारिश के दौरान पन्नी से ढकना पड़ता है ताकि पानी से नुकसान न हो। वहीं पेयजल पाइप लाइन में सीपेज की शिकायत भी सामने आई है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है।

लेडीज टीचर का टॉयलेट बंद

स्कूल प्रबंधन के अनुसार लेडीज टीचर के टॉयलेट की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि उसे बंद करना पड़ा। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी उजागर करती है।

प्रबंधन ने पहले भी की शिकायत

स्कूल के प्राचार्य संजीव कुमार पांडे और वरिष्ठ शिक्षक राजकुमार ठाकुर ने बताया कि भवन की खराब स्थिति को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

छात्रों का कहना है कि नई बिल्डिंग मिलने पर शुरुआत में खुशी थी, लेकिन अब हर बारिश के मौसम में डर का माहौल रहता है।

5 साल की गारंटी के बावजूद मरम्मत क्यों नहीं?

सरकारी नियमों के अनुसार निर्माण कार्य पर सामान्यतः 5 साल की गारंटी होती है। ऐसे में तीन साल के भीतर ही भवन में गंभीर खामियां सामने आना निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।

कार्यपालन अधिकारी अभिषेक ठाकुर ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, निरीक्षण प्रक्रिया और ठेकेदार की जिम्मेदारी की भी समीक्षा की जाएगी।

क्या गुणवत्ता से हुआ समझौता?

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया है। उनका सवाल है कि यदि गारंटी अवधि अभी शेष है तो मरम्मत कार्य तुरंत क्यों नहीं कराया जा रहा?

यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश में सरकारी स्कूलों के निर्माण और रखरखाव व्यवस्था पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।