दो दिन के इजरायल दौरे पर पीएम मोदी, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर फोकस

दो दिन के इजरायल दौरे पर पीएम मोदी, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर फोकस
February 25, 2026 at 1:31 pm

प्रधानमंत्री Narendra Modi बुधवार से दो दिवसीय इजरायल यात्रा पर हैं। नौ वर्षों में यह उनकी दूसरी इजरायल यात्रा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है।

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना है।

इजरायल की संसद को संबोधित करेंगे पीएम मोदी

दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी इजरायल की संसद (नेस्सेट) को संबोधित करेंगे। इसके अलावा वे इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

प्रधानमंत्री की मुलाकात इजरायल के राष्ट्रपति Isaac Herzog से भी निर्धारित है।

नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम मोदी के दौरे को लेकर उत्साह व्यक्त किया है। उनके सम्मान में निजी रात्रिभोज का भी आयोजन किया जाएगा।

71 हजार करोड़ के रक्षा सौदे और आयरन डोम पर चर्चा

सूत्रों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में रक्षा और सुरक्षा सहयोग प्रमुख एजेंडा रहेगा।

भारत अपनी स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली ‘सुदर्शन चक्र’ को विकसित कर रहा है। इसी संदर्भ में इजरायल की बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली Iron Dome के कुछ तकनीकी तत्वों को शामिल करने की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है।

करीब 71 हजार करोड़ रुपये के संभावित रक्षा सौदे पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है, जिससे दोनों देशों के रक्षा संबंध और मजबूत होंगे।

मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी आगे बढ़ेगी बात

भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर भी बातचीत जारी है। इस विषय पर चार दिवसीय बैठक चल रही है, जो 26 फरवरी को समाप्त होगी।

यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग में नई तेजी आ सकती है।

2017 में हुई थी पहली इजरायल यात्रा

प्रधानमंत्री मोदी की पहली इजरायल यात्रा जुलाई 2017 में हुई थी, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया था। इसके बाद जनवरी 2018 में नेतन्याहू ने भारत का दौरा किया था।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों के गहरे और दीर्घकालिक संबंधों की पुनर्पुष्टि करेगी और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग को नई दिशा देगी।