UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, जानिए अब विश्वविद्यालयों में कौन से नियम होंगे लागू

UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, जानिए अब विश्वविद्यालयों में कौन से नियम होंगे लागू
January 29, 2026 at 2:41 pm

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षा से जुड़े UGC के नए इक्विटी रेगुलेशन 2026 पर फिलहाल रोक लगा दी है। ये नियम 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए थे, लेकिन कोर्ट ने इन्हें “अस्पष्ट और दुरुपयोग की आशंका वाला” बताते हुए अगले आदेश तक लागू न करने का निर्देश दिया है।

इस फैसले के बाद देशभर की यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में एक बार फिर 2012 के पुराने UGC नियम ही लागू रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई रोक?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि—

  • नए नियमों की भाषा साफ नहीं है
  • इनके गलत इस्तेमाल की पूरी संभावना है
  • इससे समाज में विभाजन बढ़ सकता है
  • जातिविहीन समाज की दिशा में जाना चाहिए, न कि उल्टा

CJI ने कहा कि “जो लोग वाकई सुरक्षा के हकदार हैं, उनके लिए संतुलित व्यवस्था जरूरी है, लेकिन अस्पष्ट नियम समस्या बढ़ा सकते हैं।”

किसने दी थी चुनौती?

UGC के इन नियमों को कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिनमें शामिल हैं—

  • मृत्युंजय तिवारी
  • एडवोकेट विनीत जिंदल
  • राहुल दीवान


याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ये नियम:

  • सामान्य वर्ग के खिलाफ हैं
  • संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं
  • UGC एक्ट 1956 के विपरीत हैं
  • जातिगत भेदभाव की परिभाषा को सीमित करते हैं


अब कौन से नियम लागू रहेंगे?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक:

UGC के 2026 वाले नए नियम फिलहाल स्थगित (Stay) कर दिए गए हैं
अब 2012 के पुराने UGC रेगुलेशन ही लागू रहेंगे
✔ ये पुराने नियम ज्यादा सलाहात्मक (Advisory) हैं
✔ विश्वविद्यालयों पर कोई नया सख्त प्रावधान लागू नहीं होगा

यानी फिलहाल कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज को किसी नए बदलाव की चिंता नहीं करनी होगी।

अगली सुनवाई कब?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी करते हुए
19 मार्च 2026 तक जवाब दाखिल करने को कहा है।


कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि:
 नियमों को दोबारा ड्राफ्ट किया जाना चाहिए
 भाषा स्पष्ट होनी चाहिए
 किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो

निष्कर्ष

UGC के नए नियमों पर लगी यह रोक उन लोगों के लिए राहत की खबर है, जो इनसे संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंतित थे। फिलहाल शिक्षा व्यवस्था पुराने ढांचे पर ही चलेगी और अब सबकी नजरें 19 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं।