दिल्ली में एलपीजी की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, मुंडका छापे में 610 गैस सिलेंडर जब्त, एजेंसी मालिक फरार

दिल्ली में एलपीजी की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, मुंडका छापे में 610 गैस सिलेंडर जब्त, एजेंसी मालिक फरार
March 17, 2026 at 2:40 pm

राजधानी दिल्ली में एलपीजी गैस की कालाबाजारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मुंडका इलाके में एक गोदाम पर छापा मारकर 610 कमर्शियल गैस सिलेंडर जब्त किए हैं। जांच में सामने आया कि गैस एजेंसी को केवल एक कंपनी के सिलेंडर रखने की अनुमति थी, लेकिन गोदाम में कई कंपनियों के सिलेंडर अवैध रूप से जमा किए गए थे। पुलिस का मानना है कि गैस की कृत्रिम कमी पैदा कर ज्यादा दाम पर बेचने की तैयारी की जा रही थी। छापेमारी के दौरान एजेंसी मालिक फरार हो गया और उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि बाहरी दिल्ली के मुंडका क्षेत्र में स्थित एक गैस गोदाम में बड़े स्तर पर नियमों का उल्लंघन करते हुए गैस सिलेंडर जमा किए जा रहे हैं। सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें क्राइम ब्रांच के अधिकारी और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कर्मचारी शामिल थे।

टीम ने जब ‘गुरुजी इंडेन गैस सर्विस’ नाम से चल रहे गोदाम पर छापा मारा, तो वहां बड़ी संख्या में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पाए गए। जांच के दौरान कुल 610 सिलेंडर बरामद हुए। इनमें इंडेन कंपनी के 423 सिलेंडर, भारत गैस के 92 सिलेंडर और एचपी गैस के 95 सिलेंडर शामिल थे। कई सिलेंडर भरे हुए थे, जबकि कुछ खाली थे, लेकिन सभी का रिकॉर्ड सही नहीं पाया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि एजेंसी को केवल इंडेन कंपनी के कमर्शियल सिलेंडर रखने और वितरित करने की अनुमति थी। इसके बावजूद गोदाम में अन्य कंपनियों के सिलेंडर भी रखे गए थे, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

छापेमारी के समय गोदाम का मालिक मौके पर मौजूद नहीं था और फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस की टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई हैं।

देश के कई हिस्सों में हाल के समय में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई जगह लोगों ने सिलेंडर की कमी और बढ़ी हुई कीमतों की शिकायत की है। ऐसे मामलों में अक्सर यह पाया गया है कि कुछ एजेंसियां या डीलर जानबूझकर सिलेंडर छिपाकर रखते हैं ताकि बाजार में कमी दिखाई दे और बाद में अधिक कीमत पर गैस बेची जा सके।

एलपीजी को आवश्यक वस्तु की श्रेणी में रखा गया है, इसलिए इसके भंडारण, वितरण और बिक्री के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। बिना अनुमति बड़ी मात्रा में गैस सिलेंडर जमा करना कानूनन अपराध है और इसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है।

विशेषज्ञों के अनुसार, घनी आबादी वाले इलाकों में बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर रखना सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि थोड़ी सी चूक से बड़ा हादसा हो सकता है।

इस कार्रवाई का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। यदि गैस की जमाखोरी पर रोक लगती है तो बाजार में सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ेगी और लोगों को समय पर गैस मिल सकेगी। इससे कीमतों पर भी नियंत्रण रहने की संभावना है।

दिल्ली जैसे बड़े शहर में गैस की मांग बहुत ज्यादा है। ऐसे में अगर कुछ एजेंसियां अवैध तरीके से सिलेंडर रोककर रखती हैं तो इसका असर लाखों परिवारों और छोटे कारोबारियों पर पड़ता है। होटल, ढाबा, रेस्तरां और छोटे उद्योग एलपीजी पर निर्भर रहते हैं, इसलिए सप्लाई में गड़बड़ी होने से आर्थिक नुकसान भी होता है।

सुरक्षा के लिहाज से भी यह कार्रवाई अहम मानी जा रही है, क्योंकि बड़ी मात्रा में ज्वलनशील गैस का गलत तरीके से भंडारण किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था।

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने कहा कि किसी भी गैस एजेंसी को केवल उसी कंपनी के सिलेंडर रखने की अनुमति होती है जिसके साथ उसका लाइसेंस जुड़ा होता है। दूसरी कंपनियों के सिलेंडर रखना नियमों का उल्लंघन है।

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 7 और अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या सप्लाई चेन में किसी कर्मचारी या बिचौलिए की भूमिका है।

यह मामला केवल एक एजेंसी तक सीमित नहीं हो सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि गैस की कालाबाजारी अक्सर नेटवर्क के रूप में होती है, जिसमें डीलर, ट्रांसपोर्टर और बिचौलिए शामिल हो सकते हैं।

गैस संकट के समय जमाखोरी की घटनाएं बढ़ जाती हैं, क्योंकि उस समय मुनाफा कमाने का मौका ज्यादा होता है। ऐसे में प्रशासन की सख्ती जरूरी है ताकि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा न हो।

सरकार द्वारा डिजिटल स्टॉक मॉनिटरिंग और सख्त निरीक्षण व्यवस्था लागू करने की जरूरत है, जिससे हर एजेंसी का वास्तविक स्टॉक तुरंत जांचा जा सके।

दिल्ली के मुंडका में हुई छापेमारी ने यह साफ कर दिया है कि एलपीजी की कालाबाजारी अभी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। पुलिस की कार्रवाई से यह संदेश गया है कि आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

यदि प्रशासन लगातार इसी तरह सख्ती करता रहा तो न केवल कालाबाजारी पर रोक लगेगी बल्कि आम लोगों को भी राहत मिलेगी। आने वाले समय में इस मामले की जांच से और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

Q1. दिल्ली में कितने गैस सिलेंडर जब्त किए गए?
610 कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए।

Q2. छापा कहां मारा गया था?
बाहरी दिल्ली के मुंडका इलाके में एक गैस गोदाम पर।

Q3. किस कानून के तहत केस दर्ज हुआ?
आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 7 के तहत।

Q4. क्या एजेंसी को सभी कंपनियों के सिलेंडर रखने की अनुमति थी?
नहीं, एजेंसी को केवल एक कंपनी के सिलेंडर रखने की अनुमति थी।

Q5. इस कार्रवाई का आम लोगों पर क्या असर होगा?
गैस की उपलब्धता बढ़ेगी और कालाबाजारी कम होने की उम्मीद है।