दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एक बार फिर गंभीर दबाव में दिखाई दे रही है। राजधानी की लाइफलाइन मानी जाने वाली दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसों की संख्या घटकर पिछले 13 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में सामने आए आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि बसों की कमी का असर सीधे यात्रियों की संख्या, सेवा की गुणवत्ता और रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में दिल्ली की सार्वजनिक बस सेवा और ज्यादा संकट में आ सकती है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, दिल्ली परिवहन निगम के बेड़े में इस समय केवल 3,213 बसें ही सक्रिय हैं, जो पिछले कम से कम 13 वर्षों में सबसे कम संख्या है। वर्ष 2013-14 में डीटीसी के पास 5,223 बसें थीं। इस तरह एक दशक में बसों की संख्या में लगभग 38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
बीच के वर्षों में कुछ सुधार जरूर हुआ था और 2023-24 में बसों की संख्या बढ़कर 4,359 तक पहुंच गई थी, लेकिन इसके बाद फिर गिरावट शुरू हो गई। 2024-25 में बसों की संख्या घटकर 3,819 रह गई और 2025-26 में यह और कम होकर 3,213 पर आ गई।
बसों की संख्या घटने का सीधा असर यात्रियों पर पड़ा है। वर्ष 2013-14 में रोजाना औसतन 43.5 लाख लोग डीटीसी बसों से सफर करते थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या घटकर 24.3 लाख रह गई है। यानी लगभग 44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
कोविड-19 महामारी के दौरान 2020-21 में यह संख्या गिरकर 12.2 लाख तक पहुंच गई थी। बाद में इसमें सुधार हुआ, लेकिन अभी तक यात्री संख्या पुराने स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।
प्रति बस यात्रियों की संख्या में भी बदलाव आया है। पहले एक बस में औसतन 832 यात्री प्रतिदिन सफर करते थे, जबकि अब यह संख्या करीब 756 रह गई है।
दिल्ली में बस सेवा हमेशा से आम लोगों के लिए सबसे सस्ता और भरोसेमंद साधन रही है। मेट्रो के विस्तार के बावजूद, बाहरी दिल्ली, ग्रामीण इलाकों और औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए डीटीसी बसें ही मुख्य साधन हैं।
पिछले कुछ वर्षों में पुरानी सीएनजी बसों के रिटायर होने, नई बसों की खरीद में देरी, ड्राइवरों की कमी और रखरखाव से जुड़ी समस्याओं के कारण बेड़ा लगातार घटता गया।
सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक बसों पर जोर दिया, लेकिन ई-बसों की आपूर्ति समय पर नहीं होने से स्थिति और खराब हो गई।
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2021 में केवल 2 इलेक्ट्रिक बसें थीं, जबकि मार्च 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 4,338 हो गई है। अब कुल बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से ज्यादा हो चुकी है।
बसों की कमी का सबसे ज्यादा असर रोजाना नौकरी, पढ़ाई और काम के लिए सफर करने वाले लोगों पर पड़ा है।
दिल्ली जैसे बड़े शहर में सार्वजनिक परिवहन कमजोर होने का असर पूरे देश पर पड़ सकता है, क्योंकि राजधानी की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पूरे देश के लिए मॉडल मानी जाती है।
डीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पुरानी बसों के रिटायर होने और नई बसों की आपूर्ति में देरी के कारण अस्थायी रूप से बेड़ा कम हुआ है।
उन्होंने बताया कि
“नई इलेक्ट्रिक बसों को तेजी से शामिल किया जा रहा है और बंद किए गए कई रूट दोबारा शुरू किए जाएंगे। उम्मीद है कि वित्त वर्ष के अंत तक स्थिति में सुधार होगा।”
सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाकर प्रदूषण कम करने और सेवा बेहतर करने की योजना है।
विशेषज्ञों के अनुसार डीटीसी के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं
इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ना सकारात्मक संकेत है, लेकिन केवल बस खरीदने से समस्या हल नहीं होगी।
जरूरी है कि
अगर ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले समय में दिल्ली में निजी वाहन और बढ़ेंगे, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों बढ़ेंगे।
दिल्ली की बस सेवा का कमजोर होना केवल एक विभाग की समस्या नहीं बल्कि पूरे शहर के लिए चिंता का विषय है। बसों की संख्या घटने से यात्रियों की परेशानी बढ़ रही है और सार्वजनिक परिवहन पर भरोसा कम हो रहा है।
हालांकि इलेक्ट्रिक बसों का बढ़ता उपयोग भविष्य के लिए अच्छा संकेत है, लेकिन मौजूदा हालात सुधारने के लिए तेज फैसले, समय पर खरीद और बेहतर प्रबंधन जरूरी है।
अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में दिल्ली की परिवहन व्यवस्था और दबाव में आ सकती है।
1. अभी DTC के पास कितनी बसें हैं?
2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 3,213 बसें हैं।
2. बसों की संख्या क्यों कम हुई?
पुरानी बसों के रिटायर होने, नई बसों की देरी और स्टाफ की कमी के कारण।
3. क्या इलेक्ट्रिक बसें बढ़ रही हैं?
हाँ, अब 4,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो चुकी हैं।
4. यात्रियों पर क्या असर पड़ा है?
इंतजार बढ़ा है, भीड़ बढ़ी है और सफर मुश्किल हुआ है।
5. क्या हालात सुधरेंगे?
सरकार के अनुसार नई बसें आने से स्थिति धीरे-धीरे बेहतर होगी।
13 साल में सबसे छोटा हुआ DTC का बेड़ा, बसें घटीं तो बढ़ी परेशानी, लाखों यात्रियों पर पड़ा सीधा असर