अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा आर्थिक फैसला लेते हुए केविन वार्श को फेडरल रिजर्व का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था महंगाई, ऊंची ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता से जूझ रही है। ऐसे में फेड के नए प्रमुख की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।
फेडरल रिजर्व अमेरिका का केंद्रीय बैंक है, जिसके फैसले न सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था बल्कि वैश्विक बाजारों को भी प्रभावित करते हैं। ट्रंप के इस फैसले के बाद निवेशकों और अर्थशास्त्रियों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि नई लीडरशिप में फेड की मौद्रिक नीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
कौन हैं केविन वार्श?
केविन वार्श पहले भी फेडरल रिजर्व के गवर्नर रह चुके हैं और उन्हें मौद्रिक नीति का गहरा अनुभव है। वे वित्तीय बाजारों की बारीक समझ रखने वाले अर्थशास्त्री माने जाते हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बैंकिंग सिस्टम की मजबूती, महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दी थी।
ट्रंप प्रशासन को उम्मीद है कि वार्श के नेतृत्व में फेड ऐसी नीतियां अपनाएगा, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिले और निवेशकों का भरोसा मजबूत हो।
ब्याज दरों और बाजार पर क्या होगा असर?
केविन वार्श की नियुक्ति के बाद ब्याज दरों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि वे महंगाई को काबू में रखते हुए आर्थिक विकास को संतुलित करने की रणनीति अपनाएंगे।
अगर फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव करता है, तो इसका असर सीधे तौर पर—
पर देखने को मिल सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
फेडरल रिजर्व के फैसले दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की नीतियों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में केविन वार्श की नियुक्ति को वैश्विक स्तर पर बेहद अहम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह फैसला अमेरिका की आर्थिक रणनीति को नया दिशा संकेत देता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वार्श के नेतृत्व में फेड महंगाई, विकास और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कैसे संतुलन बनाता है।