शिवपुरी: पत्नी पहुंची एसपी ऑफिस, आरोप- पति बच्चों को ले गया, सास मुझे बेचने की कर रही थी कोशिश

शिवपुरी: पत्नी पहुंची एसपी ऑफिस, आरोप- पति बच्चों को ले गया, सास मुझे बेचने की कर रही थी कोशिश
March 2, 2026 at 2:15 pm

शिवपुरी (मध्यप्रदेश): जिले में पारिवारिक विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक महिला न्याय की गुहार लेकर पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंची। महिला ने अपने पति और सास पर मारपीट करने, तीन नाबालिग बच्चों को जबरन अपने साथ ले जाने और उसे बेचने की कोशिश करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

सात साल पहले हुई थी शादी

पीड़िता मंगलवती आदिवासी ने बताया कि उसका विवाह लगभग सात वर्ष पूर्व शिवपुरी जिले के ग्राम नीमडाडा निवासी सुनील आदिवासी से हुआ था। दोनों के तीन बच्चे हैं। महिला के अनुसार शादी के कुछ वर्षों बाद से ही पारिवारिक कलह शुरू हो गई थी और पति शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करता था।

26 फरवरी की घटना

महिला का आरोप है कि 26 फरवरी 2026 को दोपहर में उसका पति और सास घर आए और उसके साथ मारपीट की। इसके बाद तीनों बच्चों को जबरन अपने साथ ले गए। पीड़िता का कहना है कि उसे बच्चों से मिलने भी नहीं दिया जा रहा है और उसे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है।

सास पर बेचने की कोशिश का आरोप

महिला ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि जब उसका पति अपनी मामा की बेटी के साथ घर छोड़कर चला गया था, तब उसकी सास ने उसे एक पंजाबी व्यक्ति को बेचने की कोशिश की थी। इसी डर से उसे घर छोड़ना पड़ा। यह आरोप बेहद गंभीर है और पुलिस इसकी अलग से जांच कर रही है।

पति ने आरोपों को बताया निराधार

वहीं, पति सुनील आदिवासी ने सभी आरोपों को गलत बताया है। उसका कहना है कि पत्नी स्वयं घर छोड़कर चली गई थी और वह खरई गांव के एक व्यक्ति के साथ रहने लगी थी। पति का दावा है कि बच्चों को उसने उनकी सुरक्षा के लिए अपने पास रखा है।

पुलिस जांच और कानूनी पहलू

महिला ने एसपी से पति और सास के खिलाफ सख्त कार्रवाई और बच्चों की कस्टडी दिलाने की मांग की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग और बाल संरक्षण इकाई की सहायता भी ली जा सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि बच्चों को जबरन अलग किया गया है तो मामला संरक्षकता और घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दर्ज हो सकता है। वहीं मानव तस्करी जैसे आरोप सिद्ध होने पर गंभीर धाराएं लग सकती हैं।

फिलहाल प्रशासन निष्पक्ष जांच की बात कह रहा है और मामले को संवेदनशीलता के साथ देखा जा रहा है।