शराब घोटाले में राहत के बाद फिर मुश्किल में केजरीवाल, 6 मार्च को दिल्ली विधानसभा की प्रिविलेज कमेटी के सामने होंगे पेश

शराब घोटाले में राहत के बाद फिर मुश्किल में केजरीवाल, 6 मार्च को दिल्ली विधानसभा की प्रिविलेज कमेटी के सामने होंगे पेश
March 4, 2026 at 12:12 pm

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल एक बार फिर चर्चा में हैं। कथित शराब घोटाले के मामले में राहत मिलने के बाद अब उन्हें दिल्ली विधानसभा की प्रिविलेज कमेटी के समन पर 6 मार्च को पेश होना होगा। यह मामला विधानसभा भवन में बनाए गए कथित ‘फांसी घर’ से जुड़े विवाद से संबंधित है।

दरअसल विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने इस मुद्दे पर पूछे गए एक सवाल के संबंध में केजरीवाल को तलब किया है। इसी सिलसिले में उन्हें नोटिस जारी किया गया था।

6 मार्च को समिति के सामने पेश होंगे केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर जानकारी दी कि उन्होंने समिति को पत्र लिखकर सूचित कर दिया है कि वह समन के अनुसार 6 मार्च को समिति के सामने पेश होंगे

अपने पोस्ट में उन्होंने दिल्ली की मौजूदा समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि राजधानी में प्रदूषण, टूटी सड़कें, कूड़े के ढेर और अस्पतालों में दवाइयों की कमी जैसे कई बड़े मुद्दे हैं, लेकिन इन समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय उन्हें ‘फांसी घर’ से जुड़े सवाल को लेकर बुलाया गया है।

हालांकि केजरीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कानून और प्रक्रिया का सम्मान करते हुए समिति के सामने उपस्थित होंगे

क्या है‘फांसी घर’ विवाद?

दरअसल 9 अगस्त 2022 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ब्रिटिश काल की दिल्ली विधानसभा की इमारत के एक कमरे का उद्घाटन ‘फांसी घर’ के रूप में किया था।

पिछले साल दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के बाद इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया गया। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दावा किया कि जिस कमरे को ‘फांसी घर’ बताया गया था, वह वास्तव में भोजन वितरण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ‘टिफिन रूम’ था।

उन्होंने इस दावे के समर्थन में 2011 के वास्तुशिल्प मानचित्र का हवाला देते हुए कहा कि उस कमरे का इस्तेमाल फांसी घर के रूप में नहीं किया जाता था।

प्रिविलेज कमेटी को सौंपी गई जांच

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए जांच की जिम्मेदारी विशेषाधिकार समिति (Privilege Committee) को सौंप दी थी।

समिति को यह जांच करने के निर्देश दिए गए कि क्या इस कमरे के निर्माण और उद्घाटन के दौरान विधानसभा की गरिमा, नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ है या नहीं

बताया जा रहा है कि इससे पहले भी समिति ने संबंधित नेताओं को अपना पक्ष रखने के लिए कई बार बुलाया था, लेकिन वे पेश नहीं हो सके। इसी वजह से अब 6 मार्च की तारीख को अंतिम अवसर बताया जा रहा है।