चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च को समाप्त होगी। नवरात्रि का पर्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और देशभर के शक्तिपीठों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
नवरात्रि के पावन अवसर पर आज हम आपको उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित एक ऐसे चमत्कारी मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जिसके बारे में मान्यता है कि यहां आने से अकाल मृत्यु का संकट टल जाता है और कई बार भविष्य की चेतावनी भी मिल जाती है।
जंगल के बीच स्थित है बुढ़िया माई का सिद्धपीठ
गोरखपुर शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर कुसम्ही जंगल के बीच स्थित बुढ़िया माई मंदिर को सिद्धपीठ माना जाता है। घने जंगल में होने के बावजूद नवरात्रि के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मंदिर “काल का मंदिर” है, यानी यहां मां की कृपा से अकाल मृत्यु टल जाती है। इसी वजह से लोग यहां विशेष पूजा और अनुष्ठान करवाते हैं।
पुल टूटने की घटना से जुड़ी है रहस्यमयी कथा
लोक कथाओं के अनुसार, कई साल पहले मंदिर के पास एक बड़ा नाला था जिस पर पुल बना हुआ था। एक बार एक बारात वहां पहुंची तो सफेद साड़ी पहने एक बूढ़ी महिला ने पुल पार न करने की चेतावनी दी।
बारातियों ने बात नहीं मानी और जैसे ही वे पुल के बीच पहुंचे, पुल टूट गया और कई लोगों की मौत हो गई।
बताया जाता है कि चेतावनी देने वाली वही “बुढ़िया माई” थीं, जो बाद में अचानक गायब हो गईं। इसके बाद जंगल में रहने वाले लोगों ने कई बार उस महिला को देखा, लेकिन वह पलभर में ओझल हो जाती थी।
इसी स्थान पर बाद में बुढ़िया माई का मंदिर बनाया गया।
600 साल पुराना मंदिर, दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
माना जाता है कि बुढ़िया माई मंदिर करीब 600 साल पुराना है। नवरात्रि के समय यहां विशेष पूजा-पाठ, हवन और अनुष्ठान होते हैं।
श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की इच्छा से पैदल यात्रा कर मंदिर तक पहुंचते हैं। मंदिर तक जाने के लिए कुसम्ही जंगल के रास्ते से होकर जाना पड़ता है और रास्ते में नदी पार करने के लिए नाव की व्यवस्था भी रहती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रदेश के कई बड़े नेता और मंत्री भी यहां दर्शन के लिए आ चुके हैं।
600 साल पुराने बुढ़िया माई मंदिर का अनोखा इतिहास, यहां अकाल मृत्यु से बचाने की है मान्यता