चाबहार पोर्ट पर अमेरिका-इजरायल का हमला: भारत की रणनीतिक परियोजना पर मंडराया खतरा, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद

चाबहार पोर्ट पर अमेरिका-इजरायल का हमला: भारत की रणनीतिक परियोजना पर मंडराया खतरा, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद
March 1, 2026 at 11:31 am

चाबहार पोर्ट पर हमला, भारत की चिंता बढ़ी

अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों के बाद पश्चिम एशिया में हालात फिर से विस्फोटक हो गए हैं। दक्षिण-पूर्वी ईरान के रणनीतिक शहर चाबहारपोर्ट सिटी में भी दो जोरदार धमाकों की खबर है। धमाकों के बाद पूरे शहर में अफरा-तफरी मच गई और व्यावसायिक गतिविधियां लगभग ठप पड़ गई हैं।

चाबहार ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित है और यहां ईरानी नौसेना का अहम अड्डा और हवाई ठिकाने मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि हमले के वक्त ईरानी नौसेना की 103वीं बटालियन 100 दिन की समुद्री तैनाती पूरी कर यहीं लौटी थी।

भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार?

भारत के लिए चाबहार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल है, जिसे 2024 में हुए 10 साल के समझौते के तहत इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) संचालित कर रही है।

यह टर्मिनल अंतरराष्ट्रीय नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का अहम हिस्सा है और भारत को अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक पाकिस्तान को बाईपास कर पहुंच प्रदान करता है।

चाबहार परियोजना को भारत ने कभी अपना ‘गोल्डन गेट’ बताया था। हालांकि हालिया बजट में इस परियोजना के लिए आवंटित 100 करोड़ रुपये की राशि में कटौती ने नई दिल्ली के सतर्क रुख की ओर संकेत किया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट

हमले के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यावसायिक जहाजों के लिए बंद करने की घोषणा कर दी है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पर आरोप है कि उसने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी संदेश भेजे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है और यह ईरान तथा ओमान के मुसंदम क्षेत्र के बीच स्थित है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग माना जाता है।

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, 2024 में वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा, यानी प्रतिदिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल, इसी रास्ते से गुजरा। इसके अलावा वैश्विक एलएनजी व्यापार का भी बड़ा हिस्सा इसी मार्ग पर निर्भर है, खासकर कतर से आपूर्ति।

यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और शिपिंग लागत में तेज उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ेगा।

खाड़ी में बढ़ा सैन्य तनाव

चाबहार पर हमले के तुरंत बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत, यूएई और कतर में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी एयरस्ट्राइक की। यूएई में मिसाइल के छर्रे लगने से एक व्यक्ति की मौत की खबर है।

इसके बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। क्षेत्रीय तनाव अब सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर रहा है।

भारत के सामने रणनीतिक चुनौती

चाबहार परियोजना पर अमेरिका ने अक्टूबर में छह महीने की प्रतिबंध छूट दी थी, जो अप्रैल में समाप्त होनी है। मौजूदा हालात में वॉशिंगटन का तेहरान पर दबाव और बढ़ सकता है, जिससे भारत की निवेश योजनाएं जटिल हो सकती हैं।

चाबहार पर हमला केवल एक सैन्य घटना नहीं है, बल्कि यह भारत की क्षेत्रीय कूटनीति, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक रणनीति के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का सीधा असर अब नई दिल्ली की रणनीतिक गणनाओं पर पड़ सकता है।