मध्य पूर्व में जारी ईरान-इजरायल संघर्ष का असर सिर्फ सरहदों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका भावनात्मक असर हजारों किलोमीटर दूर बैठे परिवारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। राजस्थान के बाड़मेर की एक मां की कहानी इस सच्चाई को बयां करती है, जो दुबई में रह रहे अपने बेटे-बहू और नवजात पोते की सलामती को लेकर हर पल चिंतित रहती हैं।
दुबई से लौटते ही बढ़ी चिंता
बाड़मेर के सरदार पटेल मार्ग, जोशियो की पोल निवासी सुशीला खत्री 27 फरवरी को दुबई से अपने घर लौटीं। वह 27 दिसंबर को दुबई गई थीं, जहां बहू की डिलीवरी के दौरान साथ देने और नवजात पोते की देखभाल के लिए करीब दो महीने रहीं। परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन जैसे ही मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा, उनकी खुशी चिंता में बदल गई।
टीवी की हर ‘ब्रेकिंग न्यूज’ पर धड़कता है दिल
दुबई में बेटे-बहू के साथ बिताए खुशनुमा पलों की यादें अभी ताजा ही हैं, लेकिन अब टीवी पर ईरान-इजरायल युद्ध की खबरें देखते ही सुशीला का दिल घबरा उठता है। सुबह की पहली चाय से लेकर रात की आखिरी नींद तक, वह दिन में 7-8 बार फोन मिलाकर सिर्फ एक ही सवाल पूछती हैं—
“बेटा, सब ठीक तो है ना?”
पहले जहां वह दिन में एक-दो बार बात कर लिया करती थीं, वहीं अब हालात को देखते हुए कॉल की संख्या बढ़ गई है। वीडियो कॉल पर पोते की मुस्कान देखकर उनकी आंखें नम हो जाती हैं।
दुबई में सीए हैं बेटे संदीप
सुशीला के बेटे संदीप खत्री दुबई की एक निजी कंपनी में सीए के पद पर कार्यरत हैं। वह मां को भरोसा दिलाते हैं कि दुबई में हालात सामान्य हैं और घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर आ रही खबरें मां की चिंता को कम नहीं होने देतीं।
सुशीला कहती हैं, “हालात सामान्य बताए जा रहे हैं, लेकिन मां हूं… चिंता तो होगी ही। बस भगवान से यही प्रार्थना है कि मेरे बच्चे सुरक्षित रहें।”
सरहदों से परे मां का दिल
यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं है, बल्कि उन हजारों भारतीय परिवारों की भावनाओं को दर्शाती है, जिनके अपने लोग विदेश में रह रहे हैं। राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का सबसे गहरा असर आम परिवारों के दिलों पर पड़ता है।
हर कोई यही दुआ कर रहा है कि हालात जल्द सामान्य हों और विदेशों में रह रहे भारतीय सुरक्षित रहें। क्योंकि मां का दिल न सरहद समझता है, न राजनीति—उसे सिर्फ अपने बच्चों की सलामती की फिक्र होती है।
“बेटा, सब ठीक तो है ना?” ईरान-इजरायल युद्ध के बीच दुबई में बेटे के लिए तड़पती बाड़मेर की मां, दिन में 8 बार करती हैं कॉल