पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर पर ईडी का शिकंजा, 5 शहरों में 11 ठिकानों पर छापेमारी

पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर पर ईडी का शिकंजा, 5 शहरों में 11 ठिकानों पर छापेमारी
April 27, 2026 at 2:18 pm

पंजाब पुलिस के पूर्व उप महानिरीक्षक (DIG) हरचरण सिंह भुल्लर के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में देश के कई शहरों में एक साथ छापेमारी की है। यह कार्रवाई न केवल कानून व्यवस्था से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी पर गंभीर आरोपों को उजागर करती है, बल्कि भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के खिलाफ एजेंसियों की सख्ती को भी दर्शाती है।

प्रवर्तन निदेशालय यानी Enforcement Directorate (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर और उनके सहयोगियों के खिलाफ व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। इस कार्रवाई के तहत पंजाब के पांच अलग-अलग शहरों में कुल 11 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई।

ईडी की टीमों ने चंडीगढ़ में 2, लुधियाना जिले में 5, पटियाला में 2, नाभा में 1 और जालंधर में 1 ठिकाने पर तलाशी अभियान चलाया। इन ठिकानों में आरोपी के निजी आवास, सहयोगियों के घर और कथित बेनामी संपत्तियों से जुड़े स्थान शामिल बताए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई उस मनी ट्रेल को खंगालने के लिए की जा रही है, जिसके जरिए कथित तौर पर रिश्वत और अवैध आय को वैध संपत्ति में बदला गया। जांच एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य अहम सबूत जुटाने में लगी हुई है।

इस केस की जड़ में वे प्रेडिकेट अपराध हैं, जिन्हें Central Bureau of Investigation (CBI) और चंडीगढ़ की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने दर्ज किया था। आरोप है कि भुल्लर ने एक आपराधिक मामले को प्रभावित करने के लिए बिचौलिए के माध्यम से रिश्वत की मांग की थी।

पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर पहले ही रिश्वतखोरी के एक मामले में CBI द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक केस में राहत दिलाने के बदले लगभग 8 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। इस मामले में उनके साथ एक बिचौलिया भी पकड़ा गया था।

गिरफ्तारी के बाद भुल्लर को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था और तब से वे जेल में हैं। हाल ही में उन्होंने Supreme Court of India में जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।

जांच एजेंसियों को प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले कि भुल्लर की संपत्ति उनके ज्ञात आय स्रोतों से कहीं अधिक है। इसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।

इस कार्रवाई का असर कई स्तरों पर देखा जा सकता है। सबसे पहले, यह मामला पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को उजागर करता है। जब कानून लागू करने वाले अधिकारी ही भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरते हैं, तो जनता का भरोसा प्रभावित होता है।

दूसरी ओर, यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्र सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को भी मजबूत करती है। इससे यह संदेश जाता है कि चाहे पद कितना भी ऊंचा क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है।

इसके अलावा, इस मामले का असर पंजाब की राजनीति और प्रशासनिक ढांचे पर भी पड़ सकता है, क्योंकि ऐसे मामलों में अक्सर व्यापक नेटवर्क की जांच होती है।

ईडी के अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि यह कार्रवाई PMLA की धारा 17 के तहत की जा रही है और इसका मुख्य उद्देश्य अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) की पहचान करना और उसे जब्त करना है।

अधिकारियों के मुताबिक,
“हम मनी ट्रेल को ट्रैक कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अवैध तरीके से अर्जित धन को कहां और कैसे निवेश किया गया। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।”

हालांकि, भुल्लर या उनके वकीलों की ओर से इस पर कोई ताजा प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बड़े सिस्टम की ओर इशारा करता है जहां सत्ता और अधिकार का दुरुपयोग कर आर्थिक लाभ उठाने की कोशिश की जाती है।

ईडी की कार्रवाई यह दिखाती है कि अब जांच एजेंसियां केवल रिश्वत लेने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उस पैसे के पूरे नेटवर्क को उजागर करने पर ध्यान दे रही हैं। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से यह समझ आता है कि भ्रष्टाचार केवल एक घटना नहीं बल्कि एक संगठित प्रक्रिया हो सकती है।

इसके अलावा, अदालत द्वारा जमानत खारिज किया जाना यह दर्शाता है कि न्यायपालिका भी ऐसे मामलों में सख्त रुख अपना रही है। इससे भविष्य में ऐसे अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।

पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर पर ईडी की यह कार्रवाई देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही व्यापक मुहिम का हिस्सा है। यह केस न केवल कानून के दायरे में जवाबदेही तय करने का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जांच एजेंसियां अब अधिक सक्रिय और आक्रामक भूमिका निभा रही हैं।

आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं, जो यह तय करेंगे कि भ्रष्टाचार के इस जाल में और कौन-कौन शामिल है।

1. हरचरण सिंह भुल्लर पर क्या आरोप हैं?
उन पर रिश्वत लेने और आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप हैं।

2. ईडी ने यह कार्रवाई किस कानून के तहत की है?
यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।

3. कुल कितने ठिकानों पर छापेमारी हुई है?
पंजाब के 5 शहरों में कुल 11 ठिकानों पर छापेमारी की गई है।

4. क्या भुल्लर पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं?
हां, उन्हें CBI ने रिश्वत मामले में पहले ही गिरफ्तार किया था।

5. इस मामले की जांच अभी किस स्थिति में है?
जांच जारी है और ईडी मनी ट्रेल व बेनामी संपत्तियों की पड़ताल कर रही है।