राजधानी दिल्ली की लाइफलाइन मानी जाने वाली मेट्रो सेवा एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवालों के घेरे में आ गई है। हाल ही में शुरू किए गए दीपाली चौक–मजलिस पार्क कॉरिडोर पर उद्घाटन के मात्र चार दिन बाद ही चोरों ने सिग्नलिंग सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली कॉपर केबल चोरी कर ली, जिसके कारण मेट्रो संचालन बुरी तरह प्रभावित हो गया। इस घटना ने न केवल यात्रियों को परेशानी में डाला बल्कि दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के नए कॉरिडोर दीपाली चौक से मजलिस पार्क तक हाल ही में संचालन शुरू हुआ था। इस लाइन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था और इसे उत्तर दिल्ली के लोगों के लिए बड़ी सुविधा माना जा रहा था। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिन बाद इस कॉरिडोर पर बड़ी चोरी की घटना सामने आ गई।
जानकारी के अनुसार, चोरों ने करीब 500 मीटर लंबी कॉपर सिग्नलिंग केबल काटकर चोरी कर ली। यह केबल मेट्रो के सिग्नल सिस्टम के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसके क्षतिग्रस्त होने से ट्रेनों की गति कम करनी पड़ी और पूरे दिन मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से नहीं चल सकीं।
पुलिस जांच में सामने आया कि चोरी की यह घटना माजलिस पार्क के पास हुई। इस मामले में पुलिस ने जहांगीरपुरी निवासी 28 वर्षीय शेख साफीक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर केबल काटी और उसे बेचने की योजना बनाई। पुलिस को मौके से जली हुई केबल के टुकड़े भी मिले हैं, जिन्हें जलाकर कॉपर अलग करने की कोशिश की जा रही थी।
सिग्नलिंग सिस्टम प्रभावित होने के कारण मेट्रो ट्रेनों की गति सामान्य 60–80 किलोमीटर प्रति घंटे की बजाय करीब 25 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित करनी पड़ी। इससे हजारों यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ा।
दिल्ली मेट्रो में केबल चोरी की घटनाएं नई नहीं हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई बार मेट्रो लाइनों पर कॉपर वायर चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार जून 2024 से अब तक 80 से अधिक मामलों में केबल चोरी की शिकायत दर्ज की गई है। इन घटनाओं में करीब 22 किलोमीटर लंबी कॉपर वायर चोरी हुई, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये बताई गई है।
इससे पहले एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर भी केबल क्षतिग्रस्त होने की घटना सामने आई थी, जिसके कारण कई घंटे तक सेवाएं बाधित रही थीं। कॉपर केबल चोरी की घटनाएं इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि बाजार में कॉपर की कीमत काफी ज्यादा है और इसे बेचकर आसानी से पैसा कमाया जा सकता है।
मेट्रो जैसी हाई-टेक व्यवस्था में सिग्नलिंग केबल बेहद अहम भूमिका निभाती है। इनके बिना ट्रेन की लोकेशन, स्पीड और ट्रैक की जानकारी कंट्रोल रूम तक नहीं पहुंचती, जिससे हादसे का खतरा भी बढ़ सकता है।
इस घटना का असर सीधे यात्रियों पर पड़ा। सुबह और शाम के समय बड़ी संख्या में लोग मेट्रो से सफर करते हैं, ऐसे में ट्रेनों की गति धीमी होने से लंबी कतारें लग गईं और लोगों को देर तक इंतजार करना पड़ा।
इसके अलावा मेट्रो संचालन में देरी से दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और व्यापारियों को काफी परेशानी हुई। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी भी जताई और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
आर्थिक नुकसान भी कम नहीं है। एक तरफ मेट्रो को केबल बदलने पर खर्च करना पड़ेगा, दूसरी तरफ सेवाएं प्रभावित होने से राजस्व पर भी असर पड़ता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम बनाई गई है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। अधिकारियों ने बताया कि चोरी की गई केबल को जलाकर कॉपर निकालने की कोशिश की जा रही थी, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि इसमें कबाड़ी गिरोह शामिल हो सकता है।
दिल्ली मेट्रो के एक अधिकारी ने कहा कि सिग्नलिंग केबल बेहद संवेदनशील होती है और इसके साथ छेड़छाड़ से यात्रियों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा लगाई जाएगी।
यह घटना दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों को उजागर करती है। नए कॉरिडोर पर उद्घाटन के कुछ ही दिनों में चोरी हो जाना यह दर्शाता है कि सुरक्षा निगरानी पर्याप्त नहीं थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो लाइनों के आसपास के खाली इलाकों और जंगल वाले हिस्सों में सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही स्क्रैप खरीदने वाले कबाड़ी बाजारों की भी जांच जरूरी है, क्योंकि चोरी की गई कॉपर वायर अक्सर वहीं बेची जाती है।
अगर ऐसी घटनाएं बार-बार होती रहीं तो इससे न केवल यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित होगी बल्कि देश की आधुनिक परिवहन व्यवस्था की छवि पर भी असर पड़ेगा।
दिल्ली मेट्रो देश की सबसे आधुनिक और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मानी जाती है, लेकिन लगातार सामने आ रही केबल चोरी की घटनाएं चिंता का विषय हैं। जरूरत है कि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, निगरानी बढ़ाई जाए और चोरी करने वाले गिरोहों पर सख्त कार्रवाई की जाए। तभी यात्रियों का भरोसा कायम रखा जा सकता है और मेट्रो सेवाओं को बिना रुकावट जारी रखा जा सकता है।
1. मेट्रो में चोरी किस चीज की हुई थी?
सिग्नलिंग सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली कॉपर केबल चोरी की गई थी।
2. कितनी लंबी केबल चोरी हुई?
करीब 500 मीटर लंबी केबल काटकर ले जाई गई।
3. क्या किसी को गिरफ्तार किया गया है?
हाँ, पुलिस ने एक आरोपी शेख साफीक को गिरफ्तार किया है।
4. मेट्रो सेवाएं क्यों प्रभावित हुईं?
केबल कटने से सिग्नल सिस्टम खराब हो गया, इसलिए ट्रेनों की गति कम करनी पड़ी।
5. क्या पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं?
हाँ, पिछले एक साल में कई बार केबल चोरी के मामले सामने आ चुके हैं।
दिल्ली मेट्रो में केबल चोरी से ठप हुई सेवाएं, उद्घाटन के कुछ दिन बाद ही सामने आई बड़ी सुरक्षा चूक