भोपाल एम्स में इफ्तार कार्यक्रम को लेकर विवाद, विरोध में हनुमान चालीसा पाठ; धार्मिक आयोजनों पर छिड़ी बहस

भोपाल एम्स में इफ्तार कार्यक्रम को लेकर विवाद, विरोध में हनुमान चालीसा पाठ; धार्मिक आयोजनों पर छिड़ी बहस
March 24, 2026 at 9:06 pm

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आयोजित इफ्तार कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस आयोजन के विरोध में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने संस्थान के बाहर प्रदर्शन किया और परिसर की “शुद्धि” के नाम पर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी संस्थानों में धार्मिक आयोजनों की अनुमति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई।

सोमवार को भोपाल एम्स के मुख्य प्रवेश द्वार के पास उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि कुछ दिन पहले एम्स परिसर में रोजा इफ्तार का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो एक सरकारी और राष्ट्रीय महत्व के चिकित्सा संस्थान की धर्मनिरपेक्ष प्रकृति के खिलाफ है।

प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर किसी भी एक धर्म से जुड़ा आयोजन नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि एम्स में हर धर्म और समुदाय के लोग इलाज कराने आते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार का धार्मिक कार्यक्रम संस्थान की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।

विरोध के दौरान कई कार्यकर्ता पोस्टर और बैनर लेकर पहुंचे थे, जिन पर धार्मिक तटस्थता बनाए रखने की मांग लिखी हुई थी। कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अगर इफ्तार जैसे कार्यक्रमों की अनुमति दी जाती है, तो फिर अन्य धर्मों के त्योहारों पर भी समान रूप से आयोजन की अनुमति मिलनी चाहिए।

इसी विरोध के बीच नवरात्रि का हवाला देते हुए कुछ कार्यकर्ताओं ने परिसर के पास कन्या पूजन और हनुमान चालीसा का पाठ किया। उनका कहना था कि यह आयोजन किसी विरोध के लिए नहीं बल्कि “शुद्धि” और धार्मिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया है।

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के लिहाज से एम्स के गेट नंबर तीन को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था। हालांकि, मरीजों और कर्मचारियों को दूसरे प्रवेश द्वार से अंदर जाने की व्यवस्था की गई ताकि इलाज प्रभावित न हो।

भारत जैसे बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश में सरकारी संस्थानों की धर्मनिरपेक्षता को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। अस्पताल, विश्वविद्यालय और सरकारी कार्यालय ऐसे स्थान माने जाते हैं जहां किसी भी प्रकार के धार्मिक पक्षपात से बचने की अपेक्षा की जाती है।

पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में इफ्तार, पूजा, गुरुपर्व या अन्य धार्मिक आयोजनों को लेकर विवाद हुए हैं। कुछ लोग इन आयोजनों को सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक मानते हैं, जबकि अन्य इसे संस्थानों की तटस्थता के खिलाफ बताते हैं।

भोपाल एम्स देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में से एक है, जहां मध्य प्रदेश के अलावा आसपास के राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में यहां होने वाली किसी भी गतिविधि का असर व्यापक स्तर पर पड़ता है।

इस विवाद का असर सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में सरकारी संस्थानों में धार्मिक आयोजनों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आ रही है।

कुछ लोगों का कहना है कि अगर कोई आयोजन कर्मचारियों के स्तर पर सीमित रूप से किया गया हो तो उसे विवाद का रूप नहीं देना चाहिए। वहीं, दूसरी ओर कई लोग मानते हैं कि सरकारी संस्थानों को पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष रहना चाहिए ताकि किसी भी समुदाय को पक्षपात का एहसास न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवाद स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संवेदनशील क्षेत्र पर भी असर डाल सकते हैं, क्योंकि अस्पतालों में माहौल शांत और तटस्थ होना जरूरी होता है।

एम्स प्रशासन की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई औपचारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि संस्थान से जुड़े सूत्रों का कहना है कि परिसर में किसी भी आयोजन को लेकर नियम और दिशानिर्देश पहले से तय हैं और अगर किसी स्तर पर उनका उल्लंघन हुआ है तो इसकी जांच की जाएगी।

स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। किसी भी प्रकार की हिंसा या तोड़फोड़ की घटना सामने नहीं आई है।

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों में धार्मिक आयोजनों की सीमा क्या होनी चाहिए। भारत का संविधान सभी धर्मों को समान अधिकार देता है, लेकिन साथ ही सरकारी संस्थानों से तटस्थ रहने की अपेक्षा भी रखता है।

विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे विवाद तब बढ़ते हैं जब किसी आयोजन को लेकर स्पष्ट नीति नहीं होती या नियमों का पालन समान रूप से नहीं किया जाता। अगर किसी एक समुदाय के कार्यक्रम को अनुमति दी जाती है, तो अन्य समुदाय भी समान अधिकार की मांग करते हैं, जिससे टकराव की स्थिति बन सकती है।

इस मामले में भी यही देखने को मिला कि इफ्तार कार्यक्रम के विरोध में दूसरे धार्मिक आयोजन किए गए, जिससे विवाद और गहरा गया। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सभी राष्ट्रीय संस्थानों के लिए एक समान दिशा-निर्देश बनाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे विवाद न हों।

भोपाल एम्स में इफ्तार कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सरकारी संस्थानों की धर्मनिरपेक्षता पर बड़ी बहस का रूप ले चुका है। विरोध प्रदर्शन और धार्मिक पाठ के बाद प्रशासन पर निष्पक्ष नीति बनाने का दबाव बढ़ गया है। आने वाले दिनों में जांच और प्रशासनिक फैसलों से यह तय होगा कि ऐसे आयोजनों को लेकर भविष्य में क्या नियम बनाए जाते हैं। फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि स्वास्थ्य सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में शांति और संतुलन बनाए रखा जाए।

1. भोपाल एम्स में विवाद किस बात को लेकर हुआ?
इफ्तार कार्यक्रम के आयोजन को लेकर कुछ संगठनों ने विरोध किया और इसे सरकारी संस्थान की तटस्थता के खिलाफ बताया।

2. विरोध किसने किया?
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।

3. क्या अस्पताल के अंदर कोई हिंसा हुई?
नहीं, पुलिस की मौजूदगी में स्थिति नियंत्रण में रही और किसी हिंसा की खबर नहीं है।

4. एम्स प्रशासन ने क्या कहा?
अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन जांच की बात कही जा रही है।

5. इस विवाद का बड़ा मुद्दा क्या है?
सरकारी संस्थानों में धार्मिक आयोजनों की अनुमति और धर्मनिरपेक्षता को लेकर बहस।