द्वारका में बनेगा अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज, 806 करोड़ की परियोजना से हर साल तैयार होंगे 250 नए डॉक्टर

द्वारका में बनेगा अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज, 806 करोड़ की परियोजना से हर साल तैयार होंगे 250 नए डॉक्टर
May 8, 2026 at 1:39 pm

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल परिसर में नए मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल निर्माण परियोजना को मंजूरी दे दी है। लगभग 806 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह संस्थान न केवल चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देगा, बल्कि दिल्ली और आसपास के लाखों लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का रास्ता भी खोलेगा। इस परियोजना का उद्देश्य देश में डॉक्टरों की कमी को दूर करना और युवाओं को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराना है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 तक इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करना है।

दिल्ली सरकार की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) की बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति दी गई। द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल परिसर में बनने वाला यह मेडिकल कॉलेज राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।

सरकार के अनुसार, इस मेडिकल कॉलेज में हर वर्ष 250 एमबीबीएस सीटों की व्यवस्था होगी। इससे दिल्ली में चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे और भविष्य में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टर तैयार किए जा सकेंगे। वर्तमान समय में देश के कई हिस्सों में डॉक्टरों की भारी कमी महसूस की जा रही है। ऐसे में यह संस्थान राजधानी ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

परियोजना के अंतर्गत एक आधुनिक अकादमिक ब्लॉक, छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग हॉस्टल, फैकल्टी हाउसिंग और अत्याधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। लगभग 1,17,246 वर्गमीटर क्षेत्र में बनने वाले इस कैंपस में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, रिसर्च लैब और एडवांस मेडिकल ट्रेनिंग सेंटर बनाए जाएंगे।

इसके अतिरिक्त करीब 34,000 वर्गमीटर क्षेत्रफल का बेसमेंट भी तैयार किया जाएगा, जिसका उपयोग पार्किंग, तकनीकी सेवाओं और आपातकालीन सुविधाओं के लिए किया जाएगा। पूरे परिसर को आधुनिक सुरक्षा तकनीकों से लैस किया जाएगा, जिसमें सीसीटीवी निगरानी, फायर अलार्म और हाईटेक फायर सेफ्टी सिस्टम शामिल होंगे।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के साथ किया जाएगा। भवन निर्माण में सोलर एनर्जी, वर्षा जल संचयन और वाटर रिसाइक्लिंग सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही इमारत को भूकंपरोधी डिजाइन पर तैयार किया जाएगा और दिव्यांगजन की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए रैंप और लिफ्ट जैसी व्यवस्थाएं की जाएंगी।

निर्माण कार्य की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को दी गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि परियोजना की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए और इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।

दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। बढ़ती आबादी, नई बीमारियों और बेहतर चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता को देखते हुए सरकार लगातार स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ा रही है। कोविड-19 महामारी के दौरान देश ने डॉक्टरों और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को गंभीरता से महसूस किया था। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने मेडिकल शिक्षा और अस्पतालों के विस्तार पर विशेष ध्यान देना शुरू किया।

द्वारका और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी आबादी निवास करती है, लेकिन वहां उच्च स्तरीय मेडिकल शिक्षा संस्थानों की संख्या सीमित है। ऐसे में इस मेडिकल कॉलेज की स्थापना से न केवल छात्रों को फायदा होगा बल्कि आसपास के लोगों को बेहतर इलाज की सुविधाएं भी मिलेंगी।

भारत में डॉक्टर-रोगी अनुपात को सुधारना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार प्रति हजार आबादी पर पर्याप्त डॉक्टरों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

इस परियोजना का सबसे बड़ा प्रभाव चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिलेगा। हर वर्ष 250 नए एमबीबीएस डॉक्टर तैयार होने से आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ी मजबूती मिलेगी। इससे दिल्ली और आसपास के राज्यों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ सकती है।

द्वारका क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। निर्माण कार्य से लेकर मेडिकल और प्रशासनिक सेवाओं तक हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने की संभावना है। इसके अलावा स्थानीय व्यापार, किराये के मकान, परिवहन और अन्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।

मरीजों के लिए यह संस्थान बड़ी राहत लेकर आ सकता है। सरकारी अस्पतालों में बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिलेगी और लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी।

यह परियोजना दिल्ली को मेडिकल एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी अहम कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में यहां रिसर्च और एडवांस मेडिकल ट्रेनिंग के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य दिल्ली को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना को तय समय सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ पूरा किया जाए।

बिजवासन विधानसभा क्षेत्र के विधायक कैलाश गहलोत ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना से क्षेत्र के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलेगी और नई पीढ़ी को बेहतर चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

द्वारका लोक कल्याण मंच के अध्यक्ष डीपी वाजपेयी ने भी इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उनका कहना है कि यह संस्थान दिल्ली-एनसीआर के लोगों को बेहतर इलाज और मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में बढ़ती जनसंख्या और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को देखते हुए नए मेडिकल कॉलेजों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। दिल्ली जैसे महानगर में यह परियोजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।

हालांकि, केवल भवन निर्माण ही पर्याप्त नहीं होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि उच्च गुणवत्ता वाली फैकल्टी, आधुनिक रिसर्च सुविधाएं और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। यदि सरकार इन पहलुओं पर समान रूप से ध्यान देती है तो यह संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में शामिल हो सकता है।

इसके अतिरिक्त, परियोजना की समयबद्धता भी महत्वपूर्ण होगी। भारत में कई सरकारी परियोजनाएं देरी और लागत बढ़ने की समस्या से जूझती रही हैं। ऐसे में सरकार के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि निर्धारित बजट और समय सीमा के भीतर कार्य पूरा हो।

पर्यावरण अनुकूल तकनीकों का उपयोग इस परियोजना को और खास बनाता है। ग्रीन बिल्डिंग मॉडल भविष्य के सरकारी संस्थानों के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

द्वारका में बनने वाला नया मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल परियोजना दिल्ली के स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है। इससे न केवल मेडिकल छात्रों को आधुनिक शिक्षा प्राप्त होगी, बल्कि लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी मिलेगा। 806 करोड़ रुपये की यह परियोजना आने वाले वर्षों में राजधानी के चिकित्सा ढांचे को नई ऊंचाई देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

यदि यह परियोजना तय समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरी होती है, तो दिल्ली देश के प्रमुख मेडिकल शिक्षा केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगी।

1. द्वारका मेडिकल कॉलेज परियोजना की कुल लागत कितनी है?

इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 806 करोड़ रुपये है।

2. मेडिकल कॉलेज में हर साल कितनी एमबीबीएस सीटें होंगी?

कॉलेज में प्रति वर्ष 250 एमबीबीएस सीटों की व्यवस्था की जाएगी।

3. यह परियोजना कब तक पूरी होगी?

सरकार ने वर्ष 2028 तक परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

4. परियोजना में कौन-कौन सी सुविधाएं विकसित की जाएँगी?

इसमें अकादमिक ब्लॉक, हॉस्टल, फैकल्टी आवास, स्मार्ट क्लासरूम, एडवांस लैब, पार्किंग और सुरक्षा सिस्टम जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

5. इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा क्या होगा?

इससे डॉक्टरों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी और दिल्ली-एनसीआर के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।