राजकोट में 2500 करोड़ का साइबर फ्रॉड उजागर, बैंक अधिकारियों समेत 20 गिरफ्तार

राजकोट में 2500 करोड़ का साइबर फ्रॉड उजागर, बैंक अधिकारियों समेत 20 गिरफ्तार
April 21, 2026 at 2:03 pm

गुजरात के राजकोट से सामने आए एक बड़े साइबर फ्रॉड मामले ने पूरे देश में बैंकिंग सिस्टम और डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 2500 करोड़ रुपये के इस घोटाले में निजी बैंकों के अधिकारी भी शामिल पाए गए हैं। पुलिस ने इस मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे कुल गिरफ्तारी की संख्या 20 तक पहुंच गई है। इस खुलासे के बाद वित्तीय संस्थानों की निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा तेज हो गई है।

राजकोट पुलिस द्वारा की गई जांच में सामने आया कि यह साइबर फ्रॉड बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। इस रैकेट में शामिल लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खोलते थे और उन्हें लंबे समय तक सक्रिय बनाए रखते थे। इन खातों के जरिए भारी रकम का लेन-देन किया जाता था, जिससे बैंक के अलर्ट सिस्टम को भी चकमा दिया जा सके।

पुलिस ने जिन तीन नए आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें Yes Bank के पर्सनल मैनेजर मौलिक कामानी, Axis Bank के मैनेजर कल्पेश डांगरिया और HDFC Bank के पर्सनल बैंकर अनुराग बाल्धा शामिल हैं।

जांच के अनुसार, मौलिक कामानी ने पहले से गिरफ्तार आरोपियों की मदद करते हुए संदिग्ध खातों को खोलने और उन्हें संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसने कई दस्तावेजों का उपयोग करके इन खातों को सक्रिय रखा ताकि बड़ी रकम के ट्रांजैक्शन पर किसी तरह का संदेह न हो।

वहीं कल्पेश डांगरिया पर आरोप है कि उसने नकली पहचान पत्रों के माध्यम से खातों को खुलवाने में सहायता की। दूसरी ओर अनुराग बाल्धा ने इन खातों के वेरिफिकेशन और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें वैध दिखाने में मदद की। इतना ही नहीं, ये सभी आरोपी खातों से नकदी निकालने और उसे हवाला नेटवर्क के जरिए आगे ट्रांसफर करने में भी शामिल थे।

पुलिस के अनुसार, अब तक इस रैकेट से जुड़े 85 बैंक खातों की पहचान की जा चुकी है और राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर 535 शिकायतें दर्ज की गई हैं। सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

भारत में पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का तेजी से विस्तार हुआ है। इससे जहां सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं साइबर अपराधों में भी तेजी आई है। फर्जी खातों, KYC धोखाधड़ी और हवाला नेटवर्क के जरिए पैसे की हेराफेरी जैसे मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

इस मामले में खास बात यह है कि इसमें बैंक के अंदरूनी कर्मचारी भी शामिल पाए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अपराधियों ने सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाया। आमतौर पर बैंकिंग प्रणाली में KYC (Know Your Customer) और ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम होते हैं, लेकिन इन प्रक्रियाओं को जानबूझकर दरकिनार किया गया।

इस तरह के बड़े साइबर फ्रॉड का असर सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह लोगों के बैंकिंग सिस्टम पर विश्वास को भी कमजोर करता है। आम ग्राहक, जो अपनी मेहनत की कमाई बैंकों में सुरक्षित मानते हैं, ऐसे मामलों से असुरक्षित महसूस करने लगते हैं।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की डिजिटल सुरक्षा छवि प्रभावित हो सकती है। विदेशी निवेशक और कंपनियां ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हैं, क्योंकि यह वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।

सरकार और नियामक संस्थाओं पर भी दबाव बढ़ता है कि वे बैंकिंग नियमों को और सख्त बनाएं और निगरानी तंत्र को मजबूत करें।

राजकोट (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक विजय गुर्जर ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि यह एक संगठित साइबर अपराध नेटवर्क है, जिसमें बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने बताया कि “जांच अभी जारी है और इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। हम सभी संदिग्ध खातों और ट्रांजैक्शन की गहन जांच कर रहे हैं।”

उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

यह मामला केवल एक साइबर फ्रॉड नहीं है, बल्कि यह बैंकिंग सिस्टम की आंतरिक कमजोरियों को उजागर करता है। जब बैंक के कर्मचारी ही नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो सुरक्षा की पूरी श्रृंखला कमजोर हो जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों को रोकने के लिए मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम, AI आधारित ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग और नियमित ऑडिट जरूरी हैं। साथ ही, कर्मचारियों की बैकग्राउंड जांच और उनके कार्यों की निगरानी भी मजबूत होनी चाहिए।

इसके अलावा, ग्राहकों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। संदिग्ध कॉल, मैसेज और लिंक से बचना, और अपने बैंक खातों की नियमित जांच करना बेहद जरूरी है।

राजकोट का यह 2500 करोड़ रुपये का साइबर फ्रॉड मामला देश के लिए एक चेतावनी है। यह दिखाता है कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ सुरक्षा उपायों को भी उतना ही मजबूत बनाना जरूरी है। सरकार, बैंक और ग्राहक—तीनों को मिलकर ही इस चुनौती का सामना करना होगा।

आने वाले समय में इस मामले की जांच से और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, जो साइबर अपराध के नेटवर्क को पूरी तरह उजागर करेंगे।

1. यह साइबर फ्रॉड कहां हुआ?
यह मामला गुजरात के राजकोट में सामने आया है।

2. इस मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक कुल 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

3. क्या बैंक अधिकारी भी शामिल थे?
हां, तीन निजी बैंक अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है।

4. कितने फर्जी खाते मिले हैं?
पुलिस ने अब तक 85 फर्जी बैंक खातों की पहचान की है।

5. आम लोग इससे कैसे बच सकते हैं?
सतर्क रहकर, संदिग्ध गतिविधियों से बचकर और अपने बैंक खातों की नियमित निगरानी करके।