विधान परिषद में गरमाया सियासी माहौल: केशव प्रसाद मौर्य ने सपा के शासनकाल की घटनाओं को लेकर साधा निशाना

विधान परिषद में गरमाया सियासी माहौल: केशव प्रसाद मौर्य ने सपा के शासनकाल की घटनाओं को लेकर साधा निशाना
April 30, 2026 at 2:26 pm

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विधान परिषद में महिला आरक्षण बिल को लेकर शुरू हुई बहस ने जल्द ही राजनीतिक रूप ले लिया। इस दौरान प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए उसके शासनकाल के दौरान हुई कई चर्चित आपराधिक घटनाओं का जिक्र किया। उनके बयान ने सदन में गर्मागर्मी बढ़ा दी और सत्तापक्ष व विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

विधान परिषद में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष द्वारा विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया गया। चर्चा की शुरुआत करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल को कानून-व्यवस्था के लिहाज से कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में महिलाओं के प्रति अपराधों को लेकर सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठते रहे।

मौर्य ने अपने भाषण में सावित्री हत्याकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना प्रदेश के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय के एक विधायक पर गंभीर आरोप लगे थे, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई में ढिलाई बरती गई। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता को न्याय दिलाने में देरी हुई और आरोपी को पकड़ने में तत्परता नहीं दिखाई गई।

इसके अलावा उन्होंने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक बड़ा धब्बा है। उस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे। मौर्य ने दावा किया कि दंगों के दौरान महिलाओं के साथ गंभीर अपराध हुए और सरकार उन मामलों में सख्त कार्रवाई करने में विफल रही।

उन्होंने पूर्व मंत्री आज़म खान का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि कुछ मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण आरोपियों को संरक्षण मिला। मौर्य ने कहा कि ऐसी घटनाएं दर्शाती हैं कि उस समय कानून-व्यवस्था की स्थिति कितनी कमजोर थी।

सीतापुर में कथित गैंगरेप और हत्या के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पीड़िता को न्याय नहीं मिला और मामले में कई सवाल उठे। बदायूं की घटना को भी उन्होंने उदाहरण के रूप में पेश किया, जहां कथित रूप से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की घटना सामने आई थी। बुलंदशहर के ईंट-भट्टा मामले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं हुई।

उत्तर प्रदेश लंबे समय से कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। विभिन्न सरकारों के दौरान कई बड़ी आपराधिक घटनाएं सामने आई हैं, जिनका असर चुनावी राजनीति पर भी पड़ा है। समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच यह मुद्दा हमेशा से टकराव का कारण रहा है।

महिला सुरक्षा का मुद्दा विशेष रूप से संवेदनशील रहा है। पिछले एक दशक में देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर जागरूकता बढ़ी है और सरकारों पर सख्त कार्रवाई का दबाव भी बढ़ा है। ऐसे में पुराने मामलों को राजनीतिक मंच पर उठाना आम रणनीति बन गई है।

इस तरह के बयान राजनीतिक माहौल को और अधिक ध्रुवीकृत कर सकते हैं। जहां सत्तापक्ष इन घटनाओं के जरिए अपनी छवि मजबूत करने की कोशिश करता है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक हमला बताकर खारिज करता है।

जनता के स्तर पर इसका प्रभाव मिश्रित होता है। एक ओर लोग सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करते हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से भ्रम की स्थिति भी बनती है। महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर राजनीति होने से वास्तविक समस्याओं के समाधान में देरी भी हो सकती है।

सत्तापक्ष के नेताओं का कहना है कि वर्तमान सरकार कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से ऐसे आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताया गया है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि पुराने मामलों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है और वर्तमान मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है।

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो इस प्रकार के बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा होते हैं। पुराने मामलों को उठाकर विपक्ष को घेरना एक सामान्य राजनीतिक तरीका है। हालांकि, इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे अभी भी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि केवल आरोप लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत है कि सभी दल मिलकर महिला सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाएं। साथ ही, न्यायिक प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना भी जरूरी है ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।

विधान परिषद में हुई यह बहस दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा का मुद्दा कितना महत्वपूर्ण है। हालांकि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी रहेंगे, लेकिन जरूरी है कि इन मुद्दों पर गंभीरता से काम किया जाए। जनता की अपेक्षा है कि सरकारें केवल बयानबाजी तक सीमित न रहें, बल्कि ठोस कदम उठाकर सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करें।

1. केशव प्रसाद मौर्य ने क्या आरोप लगाए?
उन्होंने सपा शासनकाल में हुई कई आपराधिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।

2. मुजफ्फर नगर दंगे कब हुए थे?
यह दंगे साल 2013 में हुए थे और उस समय राज्य में सपा सरकार थी।

3. सपा का इस पर क्या कहना है?
सपा ने आरोपों को राजनीतिक बताया है और कहा है कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।

4. महिला सुरक्षा क्यों बड़ा मुद्दा है?
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के कारण यह सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर अहम मुद्दा बन गया है।

5. इस बहस का क्या असर हो सकता है?
यह राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है और आने वाले चुनावों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।