रेलवे अस्पतालों में शुरू होगा पेपरलेस इलाज, UMID कार्ड से मिलेगी हर सुविधा

रेलवे अस्पतालों में शुरू होगा पेपरलेस इलाज, UMID कार्ड से मिलेगी हर सुविधा
May 4, 2026 at 1:47 pm

देश में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय रेलवे ने अपने अस्पतालों में पेपरलेस इलाज की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस नई प्रणाली के तहत रेलवे कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को अब इलाज के लिए कागजी दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं होगी। केवल UMID कार्ड और HMIS ऐप के माध्यम से पूरी चिकित्सा प्रक्रिया संचालित होगी, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों में सुधार होगा।

रेलवे बोर्ड ने देशभर के 128 रेलवे अस्पतालों और 582 हेल्थ यूनिट्स में इलाज की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने के निर्देश जारी किए हैं। इस बदलाव के बाद मरीजों को अपने साथ फाइल, पर्ची या पुराने मेडिकल रिकॉर्ड लेकर चलने की जरूरत नहीं होगी।

अब मरीज केवल अपना UMID (Unique Medical Identity Card) दिखाकर अस्पताल में रजिस्ट्रेशन, डॉक्टर से परामर्श, जांच, दवा वितरण और रेफरल जैसी सभी सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। HMIS (Hospital Management Information System) ऐप पर मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री सुरक्षित रहेगी, जिसे देश के किसी भी रेलवे अस्पताल में देखा जा सकेगा।

इस नई व्यवस्था में अपॉइंटमेंट बुकिंग, डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाएं, लैब रिपोर्ट और रेफरल पत्र—all कुछ डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि गलतियों की संभावना भी कम होगी।

रेलवे बोर्ड ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जिन अस्पतालों में अभी भी कागजी प्रक्रिया चल रही है, वहां जल्द से जल्द इस डिजिटल सिस्टम को लागू किया जाए। इसके लिए सभी जोनल मुख्यालयों को दिशा-निर्देश भेज दिए गए हैं।

रेलवे लंबे समय से अपने स्वास्थ्य तंत्र को आधुनिक बनाने की कोशिश कर रहा है। पहले मरीजों को हर बार इलाज के लिए अपनी फाइल और पुराने रिकॉर्ड साथ ले जाने पड़ते थे, जिससे असुविधा होती थी और कई बार महत्वपूर्ण जानकारी छूट जाती थी।

UMID कार्ड योजना इसी समस्या को खत्म करने के लिए शुरू की गई थी। अब तक करीब 90 प्रतिशत कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके परिवारों के लिए यह कार्ड बनाया जा चुका है।

डिजिटल इंडिया अभियान के तहत सरकार का फोकस स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ने पर है, और रेलवे का यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलेगा।

पहला, मरीजों को बार-बार कागज संभालने और ले जाने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी।
दूसरा, देश के किसी भी रेलवे अस्पताल में एक ही डेटा से इलाज संभव होगा, जिससे इलाज की निरंतरता बनी रहेगी।
तीसरा, डिजिटल रिकॉर्ड होने से डॉक्टरों को मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री तुरंत मिल जाएगी, जिससे बेहतर और तेज इलाज संभव होगा।

इसके अलावा 70 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों को सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस ओपीडी और जांच की सुविधा भी मिलेगी, जिससे बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं और आसान हो जाएंगी।

गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर और ट्रांसप्लांट के मामलों में भी डिजिटल रेफरल व्यवस्था लागू की गई है, जिससे मरीजों को बार-बार प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।

रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, पारदर्शी और तेज बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “डिजिटल सिस्टम लागू होने से मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी और अस्पतालों में कामकाज अधिक व्यवस्थित होगा।”

उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में इस सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा, ताकि सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह ऑनलाइन हो सकें।

रेलवे का यह कदम स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल क्रांति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। भारत जैसे बड़े देश में, जहां लाखों कर्मचारी रेलवे से जुड़े हैं, वहां इस तरह की व्यवस्था लागू करना एक बड़ी उपलब्धि है।

हालांकि, इस सिस्टम को सफल बनाने के लिए कुछ चुनौतियां भी हैं। जैसे—ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी, इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या और तकनीकी गड़बड़ियां।

इसके बावजूद, यदि इन चुनौतियों को सही तरीके से संभाला गया, तो यह मॉडल अन्य सरकारी विभागों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

यह पहल “डिजिटल हेल्थ मिशन” के लक्ष्य को भी मजबूती देती है और भविष्य में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक आधुनिक बनाने में मदद कर सकती है।

रेलवे अस्पतालों में पेपरलेस इलाज की शुरुआत एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव है। इससे मरीजों को सुविधा, पारदर्शिता और बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी।

UMID कार्ड और HMIS ऐप के जरिए डिजिटल हेल्थ सिस्टम का विस्तार न केवल रेलवे कर्मचारियों के लिए बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य ढांचे के लिए एक प्रेरणा बन सकता है।

अगर यह प्रणाली सफल रहती है, तो आने वाले समय में अन्य सरकारी और निजी संस्थान भी इसी मॉडल को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

Q1. UMID कार्ड क्या है?
UMID कार्ड एक यूनिक मेडिकल आईडी है, जिसके जरिए रेलवे कर्मचारी और उनके परिवार स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करते हैं।

Q2. HMIS ऐप का क्या उपयोग है?
HMIS ऐप पर मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री, रिपोर्ट, दवाएं और अपॉइंटमेंट की जानकारी उपलब्ध रहती है।

Q3. क्या इस सिस्टम में कागज की जरूरत होगी?
नहीं, यह पूरी तरह पेपरलेस सिस्टम है, जिसमें सभी जानकारी डिजिटल रूप में होगी।

Q4. क्या दूसरे शहर के रेलवे अस्पताल में भी इलाज संभव होगा?
हाँ, मरीज की डिजिटल हिस्ट्री देश के किसी भी रेलवे अस्पताल में देखी जा सकती है।

Q5. बुजुर्ग मरीजों को क्या विशेष सुविधा मिलेगी?
70 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों को निजी अस्पतालों में कैशलेस ओपीडी और जांच की सुविधा मिलेगी।