बीमा के पैसों के लिए रची मौत की साजिश! भीलवाड़ा में ‘करंट हादसे’ के पीछे हत्या का सनसनीखेज खुलासा

बीमा के पैसों के लिए रची मौत की साजिश! भीलवाड़ा में ‘करंट हादसे’ के पीछे हत्या का सनसनीखेज खुलासा
May 12, 2026 at 1:27 pm

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से सामने आया एक सनसनीखेज मामला पूरे देश को झकझोर रहा है। यहां एक व्यक्ति की मौत को पहले बिजली का हादसा बताया गया, लेकिन डॉक्टर की सतर्कता और बेटे के खुलासे ने मामले को हत्या और बीमा धोखाधड़ी की बड़ी साजिश में बदल दिया। आरोप है कि एक गिरोह बीमार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाकर उनके नाम पर भारी बीमा पॉलिसी करवाता था और बाद में उनकी हत्या कर उसे हादसा दिखाने की कोशिश करता था। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और गुजरात तक इसकी कड़ियां तलाश रही है।

भीलवाड़ा के मांडल क्षेत्र में सामने आए इस मामले ने कानून व्यवस्था के साथ-साथ बीमा सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की पहचान अहमदाबाद निवासी 36 वर्षीय दीपक भाई के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दीपक लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उनकी शारीरिक स्थिति भी कमजोर थी। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने उन्हें अपने जाल में फंसाया।

पुलिस जांच में सामने आया कि 7 मई को दीपक भाई को इलाज के बहाने राजस्थान लाया गया था। देर रात उनकी मौत हो गई, लेकिन साथ आए लोगों ने इसे खेत में करंट लगने से हुई दुर्घटना बताने की कोशिश की। आरोपियों ने शव को इस तरह तैयार किया ताकि मामला पूरी तरह बिजली हादसा लगे और आसानी से बीमा क्लेम हासिल किया जा सके।

मामले ने तब नया मोड़ लिया जब मृतक के बेटे देवांश ने पुलिस के सामने कई चौंकाने वाले आरोप लगाए। देवांश के अनुसार सूरज, विशाल और अर्जुन नाम के लोग पहले लोगों का भारी बीमा करवाते थे। इसके बाद उन्हें गुजरात से राजस्थान लाकर योजनाबद्ध तरीके से मौत के घाट उतार दिया जाता था। देवांश का दावा है कि उसके पिता को भी जानबूझकर करंट दिया गया था।

उसने पुलिस को बताया कि हत्या के बाद शव को इस तरह रखा गया ताकि वह सामान्य बिजली हादसा दिखाई दे। आरोपियों ने शव को अस्पताल में छोड़ दिया और वहां से फरार हो गए। अगर डॉक्टरों ने सतर्कता नहीं दिखाई होती तो यह मामला शायद एक साधारण दुर्घटना मानकर बंद कर दिया जाता।

डॉक्टर की सतर्कता से खुली साजिश

मांडल अस्पताल में नाइट ड्यूटी पर तैनात सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. रोहित सेहरावत ने पूरे मामले में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि जब शव अस्पताल लाया गया तो पहली नजर में ही कई बातें संदिग्ध लगीं।

डॉक्टर के अनुसार शरीर पर जलने के निशान थे, लेकिन वे सामान्य करंट हादसे जैसे नहीं लग रहे थे। हाथ-पैरों पर अलग तरह के घाव दिखाई दे रहे थे जबकि शरीर पर धुएं जैसी कालिख भी थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि सीने पर ईसीजी इलेक्ट्रोड के निशान मिले, जिससे शक और गहरा हो गया।

जब डॉक्टर ने साथ आए लोगों से पूछताछ की तो उनके जवाब विरोधाभासी और असंतोषजनक थे। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। यही फैसला पूरे मामले की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।

पुलिस जांच और गिरफ्तारियां

पुलिस ने सूचना मिलते ही शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और फॉरेंसिक जांच के लिए जरूरी सैंपल भेजे। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने विश्वास सूरज सैमुअल, भीखा भाई और डालू गाडरी को गंगरार टोल नाके से हिरासत में लिया।

गांधीनगर थाना पुलिस ने हत्या, साजिश और धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक हत्या तक सीमित नहीं हो सकता। आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से इसी तरीके से बीमा क्लेम हासिल करने के लिए लोगों को निशाना बना रहा था।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं। पुलिस की एक टीम गुजरात भेजी गई है ताकि वहां से जुड़े दस्तावेज, बीमा रिकॉर्ड और संदिग्ध लोगों की जानकारी जुटाई जा सके।

भारत में बीमा धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई बार फर्जी दुर्घटनाएं दिखाकर बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये वसूलने की कोशिश की जाती है। हालांकि इस मामले ने इसलिए ज्यादा चिंता बढ़ा दी है क्योंकि इसमें हत्या को दुर्घटना साबित करने का आरोप सामने आया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और आसान पैसे की चाहत ऐसे अपराधों को बढ़ावा देती है। कमजोर और बीमार लोगों को निशाना बनाना इस बात को दिखाता है कि अपराधी किस हद तक गिर सकते हैं।

बीमा सेक्टर के जानकारों के अनुसार हाल के वर्षों में फर्जी क्लेम के मामलों में तेजी आई है, जिसके चलते कंपनियां अब मेडिकल और फॉरेंसिक जांच पर ज्यादा जोर दे रही हैं।

इस मामले का असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है। इससे पूरे समाज में डर और अविश्वास का माहौल बन सकता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह देश में बीमा प्रक्रिया और मेडिकल सत्यापन प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करेगा।

आम लोगों के लिए यह घटना एक चेतावनी भी है कि किसी भी बीमा पॉलिसी या इलाज से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए। परिवारों को भी अपने रिश्तेदारों की गतिविधियों और आर्थिक लेनदेन पर नजर रखने की जरूरत है।

इस घटना से बीमा कंपनियां भी अधिक सतर्क हो सकती हैं। भविष्य में बड़े क्लेम के मामलों में जांच प्रक्रिया और सख्त होने की संभावना है। इसका असर genuine पॉलिसी धारकों पर भी पड़ सकता है क्योंकि सत्यापन में अधिक समय लग सकता है।

पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कई और खुलासे हो सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी संगठित गिरोह की पुष्टि होती है तो मामले में बड़े स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।

मांडल अस्पताल के डॉक्टरों की भूमिका की भी सराहना की जा रही है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि डॉक्टर की सतर्कता ने एक संभावित अपराध को छिपने से बचा लिया।

यह मामला केवल एक हत्या की कहानी नहीं बल्कि समाज में बढ़ती लालच और अपराध की मानसिकता का गंभीर उदाहरण है। बीमा जैसी सुविधा, जो लोगों की सुरक्षा के लिए बनाई गई थी, उसे अपराध का जरिया बनाना बेहद चिंताजनक है।

घटना यह भी दिखाती है कि मेडिकल सिस्टम और पुलिस की सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण है। यदि डॉक्टर ने सामान्य प्रक्रिया अपनाकर शव को स्वीकार कर लिया होता तो शायद सच कभी सामने नहीं आता।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के मामलों से निपटने के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, डिजिटल बीमा रिकॉर्ड और संदिग्ध मौतों की अनिवार्य फॉरेंसिक जांच जरूरी है। इसके अलावा बीमा कंपनियों को भी हाई रिस्क पॉलिसियों की निगरानी मजबूत करनी होगी।

भीलवाड़ा का यह मामला इंसानियत को झकझोर देने वाला है। एक बीमार व्यक्ति की मौत को पैसे कमाने का जरिया बनाने का आरोप समाज के गिरते नैतिक स्तर को दिखाता है। हालांकि डॉक्टर की सतर्कता और बेटे की हिम्मत ने इस कथित साजिश को उजागर कर दिया।

अब सभी की नजर पुलिस जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी है। यदि आरोप साबित होते हैं तो यह मामला देश के सबसे गंभीर बीमा धोखाधड़ी मामलों में शामिल हो सकता है। साथ ही यह घटना प्रशासन, बीमा कंपनियों और आम जनता सभी के लिए एक बड़ा सबक बनकर सामने आई है।

1. भीलवाड़ा में क्या मामला सामने आया है?

भीलवाड़ा में एक व्यक्ति की मौत को बिजली हादसा दिखाकर बीमा क्लेम लेने की कथित साजिश का मामला सामने आया है।

2. मृतक कौन था?

मृतक की पहचान अहमदाबाद निवासी 36 वर्षीय दीपक भाई के रूप में हुई है।

3. पुलिस को शक कैसे हुआ?

अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर को शव पर मिले निशानों और परिजनों के विरोधाभासी बयानों से शक हुआ।

4. बेटे ने क्या आरोप लगाए हैं?

मृतक के बेटे देवांश ने आरोप लगाया कि कुछ लोग भारी बीमा करवाकर लोगों की हत्या करते थे।

5. पुलिस अब क्या कार्रवाई कर रही है?

पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया है और गुजरात तक नेटवर्क की जांच कर रही है।