क्या कोरोना जैसी नई तबाही ला सकता है हंतावायरस? WHO की चेतावनी के बाद बढ़ी चिंता, जानिए कितना बड़ा है खतरा

क्या कोरोना जैसी नई तबाही ला सकता है हंतावायरस? WHO की चेतावनी के बाद बढ़ी चिंता, जानिए कितना बड़ा है खतरा
May 13, 2026 at 2:13 pm

कोविड-19 महामारी की भयावह यादें अभी दुनिया के ज़ेहन से पूरी तरह मिट भी नहीं पाई हैं कि अब एक नए वायरस ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। दक्षिण अटलांटिक क्षेत्र में यात्रा कर रहे एक क्रूज शिप से जुड़े हंतावायरस संक्रमण के मामलों ने कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस वायरस को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि इसका इन्क्यूबेशन पीरियड यानी शरीर में छिपे रहने का समय काफी लंबा हो सकता है। हालांकि WHO ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इसे कोविड-19 जैसी महामारी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के कारण इसके कई देशों तक पहुंचने से चिंता जरूर बढ़ी है।

हंतावायरस को लेकर चर्चा तब तेज हुई जब दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका क्षेत्र की यात्रा करने वाले पोलर एक्सपेडिशन क्रूज शिप ‘एमवी हॉन्डियस’ पर कई यात्री अचानक बीमार पड़ गए। जांच के दौरान पता चला कि कुछ यात्री एंडीज स्ट्रेन के हंतावायरस से संक्रमित हैं। इसके बाद स्वास्थ्य एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए यात्रियों को अलग-अलग देशों में भेजा और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक इस संक्रमण का असर कम से कम सात देशों में देखा गया है। नीदरलैंड्स में दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक डॉक्टर संक्रमित पाया गया है। जर्मनी में भी एक महिला यात्री की मौत की पुष्टि हुई है। यूनाइटेड किंगडम में दो मामलों की पुष्टि हुई है और एक अन्य व्यक्ति को संदिग्ध माना जा रहा है। इसके अलावा स्विट्जरलैंड, फ्रांस, अमेरिका और स्पेन में भी संक्रमित या संदिग्ध मामले सामने आए हैं।

सबसे अधिक चिंता इस बात को लेकर जताई जा रही है कि हंतावायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड 6 से 8 सप्ताह तक हो सकता है। यानी कोई व्यक्ति संक्रमित होने के बाद लंबे समय तक सामान्य दिखाई दे सकता है और बाद में उसमें गंभीर लक्षण विकसित हो सकते हैं। यही कारण है कि कई देशों में स्वास्थ्य विभाग यात्रियों की निगरानी कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि एंडीज स्ट्रेन हंतावायरस का एक दुर्लभ प्रकार है। सामान्य तौर पर हंतावायरस संक्रमित चूहों, उनके मल-मूत्र या लार के संपर्क से फैलता है, लेकिन एंडीज स्ट्रेन में सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने की संभावना बताई गई है। यही वजह है कि स्वास्थ्य एजेंसियां इसे गंभीरता से ले रही हैं।

हंतावायरस कोई नया वायरस नहीं है। यह दशकों से वैज्ञानिकों के अध्ययन का विषय रहा है। पहली बार इस वायरस को 1950 के दशक में कोरियाई युद्ध के दौरान पहचाना गया था। बाद में अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और एशिया के कई हिस्सों में इसके मामले सामने आए।

यह वायरस मुख्य रूप से कृंतक जीवों यानी चूहों के जरिए फैलता है। जब संक्रमित चूहों का मल, मूत्र या लार सूखकर हवा में मिल जाता है और कोई व्यक्ति उसे सांस के जरिए अंदर लेता है, तब संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

हंतावायरस के कारण दो प्रमुख बीमारियां होती हैं। पहली है हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS), जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। दूसरी है हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS), जो किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।

इस वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं, जिनमें बुखार, शरीर दर्द, सिरदर्द और थकान शामिल हैं। लेकिन गंभीर स्थिति में मरीज को सांस लेने में दिक्कत, फेफड़ों में पानी भरना और ब्लड प्रेशर गिरने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में यह संक्रमण जानलेवा भी साबित होता है।

दुनिया में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय यात्रा और पर्यटन गतिविधियों के बीच इस तरह के संक्रमण का कई देशों तक पहुंचना चिंता का विषय माना जा रहा है। कोविड महामारी ने यह दिखा दिया था कि किसी एक क्षेत्र में शुरू हुआ संक्रमण कुछ ही हफ्तों में वैश्विक संकट बन सकता है।

भारत के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है। हालांकि फिलहाल भारत में हंतावायरस का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी जरूरी है। एयरपोर्ट्स और बंदरगाहों पर स्वास्थ्य जांच को मजबूत करने की आवश्यकता हो सकती है।

ग्रामीण इलाकों में जहां चूहों की संख्या अधिक होती है, वहां लोगों को साफ-सफाई और खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमित कृंतकों के संपर्क से बचाव ही इस वायरस से सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है।

वैश्विक स्तर पर भी स्वास्थ्य एजेंसियां अब महामारी प्रबंधन, निगरानी प्रणाली और संक्रमण नियंत्रण उपायों को और मजबूत करने पर जोर दे रही हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि फिलहाल हंतावायरस को कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी मानना जल्दबाजी होगी। संगठन के अधिकारियों के मुताबिक, यह वायरस कोविड की तरह तेजी से हवा के जरिए व्यापक स्तर पर नहीं फैलता।

WHO ने यह भी कहा कि एंडीज स्ट्रेन में सीमित मानव-से-मानव संक्रमण की संभावना जरूर है, लेकिन अभी तक बड़े पैमाने पर सामुदायिक संक्रमण के प्रमाण नहीं मिले हैं। संगठन ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि किसी व्यक्ति को बुखार, सांस लेने में दिक्कत या गंभीर फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें और उसने हाल ही में संक्रमित क्षेत्र की यात्रा की हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

हंतावायरस को लेकर बढ़ती चिंता का सबसे बड़ा कारण कोविड-19 की ताजा यादें हैं। दुनिया ने देखा कि शुरुआती चरण में कोरोना संक्रमण को हल्के में लेने की कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी। यही वजह है कि अब किसी भी नए वायरस को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो जाती हैं।

हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो हंतावायरस और कोविड-19 में बड़ा अंतर है। कोविड अत्यधिक संक्रामक था और आसानी से इंसान से इंसान में फैलता था, जबकि हंतावायरस का प्रसार सीमित माना जाता है। इसके बावजूद एंडीज स्ट्रेन का इंसानों के बीच फैलने की क्षमता चिंता बढ़ाती है।

एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जलवायु परिवर्तन और तेजी से बदलते पर्यावरण के कारण इंसानों और जंगली जीवों के बीच संपर्क बढ़ रहा है। इससे नए वायरस और संक्रमणों के उभरने का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि दुनिया को अब भविष्य की महामारियों के लिए पहले से ज्यादा तैयार रहने की जरूरत है। बेहतर निगरानी, तेज जांच व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही ऐसे खतरों से निपटने का प्रभावी तरीका हो सकता है।

हंतावायरस को लेकर मौजूदा स्थिति गंभीर जरूर है, लेकिन फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। WHO और विभिन्न देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं। कोविड महामारी के बाद दुनिया पहले की तुलना में अधिक सतर्क और तैयार है।

लोगों के लिए जरूरी है कि वे अफवाहों से बचें, आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और स्वच्छता संबंधी सावधानियों का पालन करें। किसी भी नए संक्रमण से बचाव के लिए जागरूकता और समय पर चिकित्सा सलाह सबसे महत्वपूर्ण हथियार हैं।

1. हंता वायरस क्या है?

हंतावायरस एक संक्रमणकारी वायरस है जो मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और उनके मल-मूत्र के संपर्क से फैलता है।

2. क्या हंता वायरस कोरोना वायरस जितना खतरनाक है?

फिलहाल वैज्ञानिकों का मानना है कि यह कोविड-19 जितना तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं है। हालांकि कुछ स्ट्रेन सीमित मानव-से-मानव संक्रमण फैला सकते हैं।

3. हंता वायरस के प्रमुख लक्षण क्या हैं?

बुखार, थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और सांस लेने में परेशानी इसके प्रमुख लक्षण हैं।

4. क्या भारत में इसका खतरा है?

अभी भारत में बड़े स्तर पर कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा के कारण सतर्कता जरूरी मानी जा रही है।

5. हंता वायरस से बचाव कैसे किया जा सकता है?

चूहों से दूरी बनाकर रखना, साफ-सफाई बनाए रखना और संक्रमित क्षेत्रों में सावधानी बरतना सबसे प्रभावी बचाव उपाय हैं।