करीब डेढ़ महीने तक बंद रहने के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि इस राहत के साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने जहां इस घटनाक्रम को अपनी कूटनीतिक सफलता बताया, वहीं Iran ने उनके दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz लगभग 47 दिनों तक बाधित रहने के बाद अब फिर से जहाजों के लिए खोल दिया गया है। इस रास्ते से दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है, इसलिए इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता देखने को मिली थी।
ट्रंप ने घोषणा करते हुए कहा कि अब यह मार्ग पूरी तरह सुरक्षित है और जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से शुरू हो चुकी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच अधिकांश बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और जल्द ही एक औपचारिक समझौते की घोषणा की जा सकती है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के भंडार को सौंपने के लिए तैयार हो गया है, जो कि अमेरिका की प्रमुख मांग रही है। उन्होंने इसे क्षेत्रीय शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
लेकिन ईरान ने इन दावों को सिरे से नकार दिया। तेहरान से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि न तो कोई अंतिम समझौता हुआ है और न ही यूरेनियम सौंपने जैसी कोई बात तय हुई है। उन्होंने ट्रंप के बयान को “भ्रामक और राजनीतिक” करार दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय से भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र रहा है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और ईरान जैसे तेल उत्पादक देशों के लिए जीवनरेखा का काम करता है।
पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र में कई बार टैंकरों पर हमले, ड्रोन गतिविधियां और सैन्य तनाव देखने को मिले। इसी कारण सुरक्षा कारणों से इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई और कई देशों ने वैकल्पिक रास्तों का सहारा लिया।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा है। अमेरिका लगातार यह मांग करता रहा है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे न बढ़े, जबकि ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम केवल ऊर्जा और शोध के लिए है।
होर्मुज के खुलने का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिल सकती है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में इस मार्ग के खुलने से न केवल तेल की आपूर्ति सुचारु होगी बल्कि परिवहन लागत में भी कमी आ सकती है।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, शिपिंग और बीमा सेक्टर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच जारी बयानबाजी यह संकेत देती है कि क्षेत्र में पूरी तरह स्थिरता अभी दूर है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम किसी भी प्रकार के दबाव में आकर अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेंगे। अमेरिका द्वारा किए जा रहे दावे वास्तविकता से परे हैं।”
वहीं अमेरिकी पक्ष से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बातचीत जारी है और कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक कूटनीतिक सफलता या असफलता के रूप में देखना उचित नहीं होगा। होर्मुज का खुलना निश्चित रूप से एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसके पीछे की राजनीति जटिल है।
ट्रंप का बयान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को ध्यान में रखते हुए दिया गया प्रतीत होता है। वे इसे अपनी विदेश नीति की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं। दूसरी ओर, ईरान अपने रुख को मजबूत दिखाते हुए यह संदेश देना चाहता है कि वह किसी दबाव में नहीं झुकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली नहीं होती, तब तक किसी भी समझौते की स्थिरता संदिग्ध रहेगी। इसके अलावा, क्षेत्र में अन्य देशों की भूमिका भी इस समीकरण को प्रभावित करती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का फिर से खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर है, लेकिन इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी यह दिखाती है कि हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देश वास्तव में किसी ठोस समझौते तक पहुंच पाते हैं या यह केवल बयानबाजी तक सीमित रह जाता है। फिलहाल, दुनिया की नजरें इस संवेदनशील क्षेत्र पर बनी हुई हैं।
1. होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
यह दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है।
2. यह कितने समय तक बंद रहेगा?
लगभग 47 दिनों तक इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित रही।
3. ट्रंप ने क्या दावा किया है?
उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता करीब है और बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।
4. ईरान का क्या कहना है?
ईरान ने इन दावों को गलत और भ्रामक बताया है।
5. इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा?
तेल की कीमतों में स्थिरता आने से भारत को आर्थिक राहत मिल सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुला, लेकिन बयानबाजी तेज: ईरान ने ट्रंप के दावों को बताया गलत