ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वैश्विक चिंता का केंद्र बना दिया है। इस समुद्री मार्ग में कई तेल और गैस टैंकरों के फंसने की खबरों के बीच भारत सरकार ने साफ कहा है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है और जरूरत पड़ने पर नौसेना की मदद से एस्कॉर्ट कर सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा। सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था भी तैयार रखी गई है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह वही समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। हालात बिगड़ने के बाद कई देशों के तेल टैंकर इस इलाके में रुक गए हैं। भारतीय झंडे वाले कुछ जहाज भी इसी क्षेत्र में मौजूद हैं, जिन्हें लेकर सरकार सतर्क हो गई है।
शिपिंग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सरकार ने एक विशेष निगरानी तंत्र बनाया है जो हर कुछ घंटों में जहाजों की स्थिति की जानकारी ले रहा है। जहाजों के कप्तानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से अपनी लोकेशन, सुरक्षा स्थिति और क्रू की जानकारी भेजते रहें। यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि जहाजों में पर्याप्त भोजन, ईंधन और जरूरी सामान मौजूद हो ताकि किसी आपात स्थिति में परेशानी न हो।
सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर होर्मुज में तनाव और बढ़ता है तो जहाजों को सुरक्षित बाहर कैसे निकाला जाए। इसके लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें भारतीय नौसेना की सुरक्षा में जहाजों को एस्कॉर्ट करना भी शामिल है। जरूरत पड़ने पर मित्र देशों से भी सहयोग लिया जा सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला बेहद संकरा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग एक चौथाई हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसलिए इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।
ईरान और इजरायल के बीच हाल के सैन्य तनाव के बाद इस क्षेत्र में सुरक्षा खतरा बढ़ गया है। ईरान की ओर से चेतावनी दी गई थी कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो इस समुद्री मार्ग को बंद भी किया जा सकता है। इसी आशंका के चलते कई तेल कंपनियों ने अपने जहाजों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल और गैस आयात करके पूरा करता है, जिसमें से काफी सप्लाई खाड़ी देशों से आती है। इसलिए होर्मुज में किसी भी तरह की रुकावट भारत के लिए चिंता का विषय बन जाती है।
अगर यह संकट लंबा चलता है तो पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर असर पड़ सकता है। भारत में पहले से ही ऊर्जा की मांग काफी ज्यादा है और ऐसे में सप्लाई बाधित होने पर कीमतें बढ़ने का खतरा रहता है।
होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट और उद्योग जैसे सेक्टर सीधे तौर पर ईंधन पर निर्भर हैं। इसलिए सरकार नहीं चाहती कि किसी भी तरह की कमी या घबराहट का माहौल बने।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज पूरी तरह बंद हो जाता है तो दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। हालांकि भारत ने पहले से ही रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक सप्लाई लाइनों पर काम शुरू कर दिया है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जहाज सुरक्षित हैं और किसी पर हमला नहीं हुआ है। अधिकारियों ने कहा कि सरकार ने सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए हैं, जिनके तहत सभी जहाजों को नियमित रिपोर्ट देनी होगी।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग की एडवाइजरी के अनुसार, जहाजों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा और किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत भारतीय नौसेना से संपर्क करना होगा।
सरकार ने यह भी कहा है कि देश में तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रास्तों से सप्लाई लाई जाएगी।
भारत की रणनीति साफ तौर पर दो हिस्सों में बंटी हुई दिख रही है। पहला, अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। दूसरा, देश में ईंधन की सप्लाई को किसी भी हालत में जारी रखना।
होर्मुज संकट से यह भी साफ हो गया है कि भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की जरूरत है। सरकार पहले ही रणनीतिक तेल भंडार, नवीकरणीय ऊर्जा और अलग-अलग देशों से आयात बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
अगर भारत अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने में सफल रहता है तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी क्षमता और कूटनीतिक संतुलन को भी दिखाएगा। भारत के ईरान और खाड़ी देशों के साथ अच्छे संबंध इस समय काम आ सकते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, लेकिन भारत ने स्थिति को संभालने के लिए पहले से तैयारी कर रखी है। जहाजों की सुरक्षा, वैकल्पिक सप्लाई और रणनीतिक भंडार के सहारे सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश में ईंधन संकट न पैदा हो। आने वाले दिनों में हालात कैसे बदलते हैं, इस पर दुनिया की नजर बनी रहेगी, लेकिन फिलहाल भारत ने सतर्क और संतुलित कदम उठाए हैं।
1. होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
2. क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की कमी हो सकती है?
सरकार के अनुसार फिलहाल कोई कमी नहीं होगी, पर्याप्त भंडार मौजूद है।
3. भारतीय जहाज वहां क्यों फँसे हैं?
क्षेत्र में सुरक्षा खतरे के कारण जहाजों की आवाजाही धीमी कर दी गई है।
4. क्या भारतीय नौसेना जहाजों को बचाएगी?
जरूरत पड़ने पर नौसेना की एस्कॉर्ट व्यवस्था की जा सकती है।
5. क्या तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं?
अगर संकट लंबा चला तो वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी संभव है।
होर्मुज संकट के बीच भारत का बड़ा प्लान, ईंधन वाले जहाजों को सुरक्षित निकालने की तैयारी, तेल आपूर्ति पर सरकार की नजर