मणिपुर में फिर भड़की हिंसा: उखरुल-कामजोंग में गोलीबारी, 3 की मौत, कई घायल

मणिपुर में फिर भड़की हिंसा: उखरुल-कामजोंग में गोलीबारी, 3 की मौत, कई घायल
April 25, 2026 at 1:52 pm

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। लंबे समय से जातीय तनाव झेल रहे इस राज्य में शुक्रवार को ताजा हिंसक घटनाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया। उखरुल और कामजोंग जिलों में अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कम से कम पांच अन्य घायल बताए जा रहे हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शुक्रवार सुबह उखरुल जिले के मुल्लम गांव और आसपास के इलाकों में दो अलग-अलग घटनाओं में हिंसा भड़क उठी। पहली घटना सुबह करीब 5:30 बजे सामने आई, जब तांगखुल नागा और कुकी समुदाय से जुड़े सशस्त्र समूहों के बीच भारी गोलीबारी हुई। इस दौरान गांव के बाहरी हिस्से में स्थित कई घरों में आग लगा दी गई, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।

ग्रामीणों ने अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन किया। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को तुरंत अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात करना पड़ा।

दूसरी घटना करीब 11:25 बजे सामने आई, जब सुरक्षाबलों ने मुल्लम गांव के पास दो शव बरामद किए। मृतकों की पहचान एल. सितल्हौ और पी. हाओलाई के रूप में हुई है। दोनों के शरीर पर गोलियों के निशान पाए गए और वे कथित तौर पर कैमोफ्लाज वर्दी में थे, जिससे उनके किसी उग्रवादी समूह से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

इसी दिन तड़के एक और घटना में सिनाकेइथेई गांव के पास घात लगाकर किए गए हमले में 29 वर्षीय एच. जमांग की मौत हो गई। वह कथित रूप से एक नागा ग्राम रक्षक के रूप में गश्त पर तैनात था। इस घटना ने इलाके में तनाव को और बढ़ा दिया।

मणिपुर में पिछले कुछ वर्षों से जातीय संघर्ष लगातार एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। खासतौर पर नागा और कुकी समुदायों के बीच जमीन, पहचान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर तनाव समय-समय पर हिंसक रूप ले लेता है।

2023 से शुरू हुए बड़े स्तर के जातीय संघर्ष के बाद राज्य में स्थिति कई बार नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। हालांकि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा शांति बहाली के प्रयास किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर अविश्वास और असुरक्षा की भावना अब भी बनी हुई है।

उखरुल और कामजोंग जैसे सीमावर्ती जिले, जहां विभिन्न जनजातीय समूहों की आबादी मिश्रित है, अक्सर इस तरह के संघर्ष के केंद्र बनते रहे हैं।

इन घटनाओं का असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव पूरे राज्य और देश पर पड़ता है।

  • स्थानीय लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल गहरा गया है
  • कई परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं
  • शिक्षा और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं
  • निवेश और पर्यटन पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है

राष्ट्रीय स्तर पर भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि पूर्वोत्तर भारत की स्थिरता देश की सामरिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।

प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए इलाके में अतिरिक्त बलों की तैनाती की है। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। वहीं, विभिन्न संगठनों ने भी निष्पक्ष जांच और दोषियों की पहचान की मांग की है।

मणिपुर में बार-बार भड़क रही हिंसा कई गहरे सामाजिक और राजनीतिक कारणों की ओर इशारा करती है।

पहला, विभिन्न जनजातीय समुदायों के बीच ऐतिहासिक अविश्वास अब भी खत्म नहीं हो पाया है।
दूसरा, सीमावर्ती इलाकों में उग्रवादी गतिविधियों की मौजूदगी स्थिति को और जटिल बनाती है।
तीसरा, स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक पकड़ कमजोर होने के कारण छोटे विवाद भी बड़े संघर्ष में बदल जाते हैं।

यदि इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो यह स्थिति भविष्य में और गंभीर हो सकती है। इसके लिए केवल सुरक्षा उपाय ही नहीं, बल्कि संवाद, विश्वास निर्माण और विकास योजनाओं पर भी ध्यान देना होगा।

मणिपुर में ताजा हिंसा एक बार फिर यह दिखाती है कि राज्य में शांति अभी भी नाजुक स्थिति में है। सरकार और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल हिंसा को रोकना नहीं, बल्कि स्थायी समाधान निकालना है। जब तक सभी समुदायों के बीच विश्वास बहाल नहीं होता, तब तक इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहेगी।

1. मणिपुर में हिंसा क्यों हो रही है?
मुख्य कारण जातीय तनाव, जमीन विवाद और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे हैं।

2. इस घटना में कितने लोगों की मौत हुई?
ताजा घटनाओं में तीन लोगों की मौत हुई है।

3. कौन-कौन से इलाके प्रभावित हुए हैं?
उखरुल और कामजोंग जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

4. सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और जांच शुरू की गई है।

5. क्या स्थिति नियंत्रण में है?
स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण है, लेकिन प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।