ईरान के होर्मोज़गन प्रांत के मीनाब शहर में एक गर्ल्स प्राइमरी स्कूल पर हुए घातक मिसाइल हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। इस हमले में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश फैल गया है। शुरुआती जांच में जिस हथियार के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है, वह अमेरिकी निर्मित टोमहॉक क्रूज मिसाइल बताई जा रही है। इसी वजह से अमेरिका की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले में अमेरिकी जिम्मेदारी से इनकार करते हुए उल्टा ईरान पर ही आरोप लगाया है। लेकिन रक्षा विशेषज्ञों और जांचकर्ताओं के विश्लेषण ने इस मामले को और उलझा दिया है।
28 फरवरी को दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर में स्थित शजरेह तैयबेह गर्ल्स प्राइमरी स्कूल पर एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार इस हमले में 150 से अधिक लोगों की मौत हुई, जिनमें ज्यादातर छात्राएं थीं। हमले के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में जो वीडियो सामने आए, उनमें एक तेज गति से नीचे गिरती मिसाइल जैसी वस्तु दिखाई देती है, जो स्कूल परिसर में टकराने के बाद बड़ा विस्फोट करती है।
खोजी पत्रकारों और ओपन-सोर्स जांच करने वाले समूहों ने वीडियो की लोकेशन की पुष्टि की। अंतरराष्ट्रीय जांच समूह Bellingcat से जुड़े विशेषज्ञों ने फुटेज का विश्लेषण कर कहा कि हमले में इस्तेमाल हथियार टोमहॉक क्रूज मिसाइल जैसा दिखाई देता है। यह मिसाइल लंबी दूरी से सटीक निशाना साधने के लिए जानी जाती है और दुनिया की सबसे उन्नत क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है।
जांचकर्ताओं का कहना है कि वीडियो छोटा है और मौके से मलबे की स्वतंत्र जांच नहीं हो सकी, क्योंकि क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं निकाला जा सकता, लेकिन उपलब्ध संकेतों ने शक को और गहरा कर दिया है।
टोमहॉक लैंड अटैक मिसाइल (TLAM) अमेरिका द्वारा विकसित एक लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल है। इसे शीत युद्ध के समय बनाया गया था ताकि दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला किया जा सके। यह मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़ते हुए रडार से बच सकती है और करीब 1500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार कर सकती है।
इस मिसाइल का निर्माण पहले जनरल डायनेमिक्स और बाद में अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन ने किया। वर्तमान में इसका सबसे उन्नत संस्करण ब्लॉक-V माना जाता है।
दुनिया में बहुत कम देशों के पास टोमहॉक मिसाइल है। अमेरिका इसका मुख्य ऑपरेटर है, जबकि ब्रिटेन भी इसे अपनी पनडुब्बियों से तैनात करता है। जापान, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड ने हाल के वर्षों में इसे खरीदने या परीक्षण करने की योजना बनाई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास टोमहॉक मिसाइल होने का कोई प्रमाण नहीं है। ईरान ने अपनी अलग क्रूज मिसाइलें बनाई हैं, लेकिन उनकी तकनीक अलग है।
ईरान के स्कूल पर हुए हमले का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है। इस घटना के बाद तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है, क्योंकि होर्मोज़गन प्रांत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है।
भारत पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल खाड़ी देशों से खरीदता है। अगर तनाव बढ़ता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और गैस की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है।
इसके अलावा खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
अमेरिका की ओर से कहा गया है कि मीनाब के आसपास सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन स्कूल को निशाना बनाने का कोई इरादा नहीं था। अमेरिकी रक्षा विभाग ने घटना की जांच की बात कही है।
डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके अनुसार यह हमला ईरान की गलती भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान के हथियार सटीक नहीं होते और कई बार वे खुद ही अपने इलाके को नुकसान पहुंचा देते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम राय देंगे।
इजरायल ने इस हमले में शामिल होने से इनकार किया है। वहीं ईरान ने इसे युद्ध अपराध बताया है और अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है।
इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला सवाल यह है कि अगर मिसाइल वास्तव में टोमहॉक थी, तो इसे किसने दागा। क्योंकि यह मिसाइल केवल कुछ ही देशों के पास है।
दूसरा सवाल यह है कि क्या सैन्य ठिकाने के पास स्कूल होने के कारण यह हमला हुआ या फिर खुफिया जानकारी गलत थी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में सटीक हथियार होने के बावजूद नागरिकों की मौत को पूरी तरह रोक पाना मुश्किल होता है। लेकिन बच्चों के स्कूल पर हमला होना गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि ट्रंप का बयान राजनीतिक दबाव के कारण हो सकता है, क्योंकि अगर अमेरिका की जिम्मेदारी साबित होती है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विरोध हो सकता है।
ईरान के स्कूल पर हुए मिसाइल हमले ने दुनिया को फिर याद दिलाया है कि युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को होता है। टोमहॉक मिसाइल के इस्तेमाल की आशंका ने इस घटना को और संवेदनशील बना दिया है।
जब तक स्वतंत्र जांच पूरी नहीं होती, तब तक यह कहना मुश्किल है कि हमला किसने किया, लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने अमेरिका-ईरान तनाव को और बढ़ा दिया है और इसका असर पूरी दुनिया, खासकर तेल पर निर्भर देशों जैसे भारत पर पड़ सकता है।
1. टोम हॉक मिसाइल क्या है?
यह अमेरिका की लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल है जो सटीक निशाना लगाने के लिए जानी जाती है।
2. क्या ईरान के पास टोम हॉक मिसाइल है?
अब तक कोई प्रमाण नहीं मिला कि ईरान के पास यह मिसाइल है।
3. स्कूल पर हमला क्यों हुआ?
स्कूल एक सैन्य सुविधा के पास था, इसलिए गलती या गलत जानकारी की संभावना बताई जा रही है।
4. क्या अमेरिका ने हमले की जिम्मेदारी ली है?
अमेरिका ने सीधे जिम्मेदारी नहीं मानी, लेकिन जांच की बात कही है।
5. भारत पर इसका क्या असर होगा?
तेल की कीमत बढ़ सकती है और खाड़ी में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा चिंता का विषय बन सकती है।
ईरान के स्कूल पर मिसाइल हमला: टोमहॉक विवाद में घिरे अमेरिका, ट्रंप के बयान पर उठे सवाल