भारतीय स्टार्टअप की Li-Fi तकनीक का कमाल, अब रोशनी से चलेगा तेज इंटरनेट, ग्रामीण इलाकों तक पहुंचेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी

भारतीय स्टार्टअप की Li-Fi तकनीक का कमाल, अब रोशनी से चलेगा तेज इंटरनेट, ग्रामीण इलाकों तक पहुंचेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी
March 25, 2026 at 5:30 pm

भारत में तकनीकी नवाचार की रफ्तार लगातार बढ़ रही है और अब देश की एक स्टार्टअप कंपनी ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जो इंटरनेट की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकती है। दिल्ली-एनसीआर स्थित कंपनी वेलमेनी (Velmenni) ने Li-Fi यानी लाइट फिडेलिटी तकनीक पर काम करके यह साबित कर दिया है कि भविष्य में इंटरनेट केवल तार या रेडियो वेव्स से नहीं बल्कि रोशनी के जरिए भी चलाया जा सकता है। इस तकनीक को इंटरनेट कनेक्टिविटी की दुनिया में अगली बड़ी क्रांति माना जा रहा है, क्योंकि यह पारंपरिक Wi-Fi से कई गुना तेज और सुरक्षित बताई जा रही है।

दिल्ली-एनसीआर की स्टार्टअप कंपनी वेलमेनी के संस्थापक दीपक सोलंकी ने वर्ष 2014 में Li-Fi तकनीक पर काम शुरू किया था। उस समय दुनिया में बहुत कम कंपनियां इस क्षेत्र में प्रयोग कर रही थीं। इस तकनीक का मूल सिद्धांत यह है कि इंटरनेट डेटा को रेडियो वेव्स के बजाय एलईडी लाइट या लेजर बीम के माध्यम से ट्रांसफर किया जाता है।

पारंपरिक इंटरनेट सिस्टम में डेटा ट्रांसमिशन के लिए फाइबर ऑप्टिक केबल और Wi-Fi राउटर का उपयोग किया जाता है, लेकिन Li-Fi तकनीक में रोशनी के जरिए बहुत तेज गति से डेटा भेजा जा सकता है। कंपनी का दावा है कि यह तकनीक 10 Gbps से अधिक की स्पीड देने में सक्षम है, जो सामान्य वाई-फाई की तुलना में कई गुना अधिक है।

इस तकनीक का एक और बड़ा फायदा यह है कि इसे फ्री-स्पेस ऑप्टिक्स के जरिए 1 से 25 किलोमीटर की दूरी तक इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि जहां फाइबर केबल बिछाना मुश्किल या महंगा है, वहां भी हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है।

दीपक सोलंकी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई एलपीयू, जालंधर से बी.टेक के रूप में पूरी की और इसके बाद आईआईआईटी-हैदराबाद से रिसर्च किया। वेलमेनी शुरू करने से पहले उन्होंने फ्रांस और भारत के कई टेक स्टार्टअप्स के साथ काम किया था।

Li-Fi तकनीक का विचार पहली बार 2011 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आया था, जब वैज्ञानिकों ने एलईडी लाइट के जरिए डेटा ट्रांसमिशन का सफल प्रयोग किया था। इसके बाद कई देशों में इस पर रिसर्च शुरू हुई, लेकिन भारत में इस तकनीक को व्यावहारिक रूप देने वाली कंपनियां बहुत कम थीं।

भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है, खासकर ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में। फाइबर नेटवर्क बिछाने में भारी खर्च आता है और कई जगह भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह संभव नहीं हो पाता। ऐसे में Li-Fi जैसी तकनीक देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

डिजिटल इंडिया अभियान के बाद देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन अभी भी लाखों लोग ऐसे हैं जिन तक तेज इंटरनेट नहीं पहुंच पाया है। नई तकनीकें इस अंतर को कम करने में मदद कर सकती हैं।

अगर Li-Fi तकनीक बड़े स्तर पर लागू होती है तो इसका असर कई क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।

सबसे पहले, ग्रामीण भारत में इंटरनेट की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। जहां केबल बिछाना मुश्किल है, वहां लाइट बेस्ड नेटवर्क आसानी से लगाया जा सकता है।

दूसरा, यह तकनीक सुरक्षा के मामले में भी बेहतर मानी जा रही है क्योंकि लाइट सिग्नल दीवार के पार नहीं जाते, जिससे डेटा चोरी की संभावना कम हो जाती है।

तीसरा, रक्षा, रेलवे, स्मार्ट सिटी, अस्पताल और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में हाई-स्पीड और सुरक्षित इंटरनेट की जरूरत होती है। Li-Fi इन क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

इसके अलावा, 5G और आने वाले 6G नेटवर्क के साथ भी इस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है, जिससे इंटरनेट की स्पीड और क्षमता दोनों बढ़ सकती हैं।

कंपनी के संस्थापक दीपक सोलंकी के अनुसार, Li-Fi तकनीक का उद्देश्य केवल तेज इंटरनेट देना नहीं है, बल्कि ऐसे क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी पहुंचाना है जहां आज भी लोग डिजिटल सेवाओं से दूर हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर इस तकनीक को अपनाएं तो भारत दुनिया के सबसे तेज इंटरनेट नेटवर्क वाले देशों में शामिल हो सकता है।

तकनीकी विशेषज्ञों का भी मानना है कि आने वाले वर्षों में लाइट-बेस्ड कम्युनिकेशन सिस्टम का उपयोग तेजी से बढ़ेगा और यह पारंपरिक Wi-Fi का विकल्प बन सकता है।

Li-Fi तकनीक को इंटरनेट की दुनिया में अगली पीढ़ी की तकनीक माना जा रहा है, लेकिन इसे बड़े स्तर पर लागू करने के लिए अभी कई चुनौतियां भी हैं।

सबसे बड़ी चुनौती है इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और लागत। हालांकि कंपनी का दावा है कि यह फाइबर से सस्ती है, लेकिन शुरुआती स्तर पर नई तकनीक को स्थापित करने में निवेश की जरूरत होगी।

दूसरी चुनौती है जागरूकता की कमी। अभी भी बहुत कम लोग Li-Fi के बारे में जानते हैं, इसलिए इसे अपनाने में समय लग सकता है।

इसके बावजूद, भारत जैसे देश के लिए यह तकनीक बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि यहां बड़े भौगोलिक क्षेत्र में इंटरनेट पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। अगर सरकार डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटी और ग्रामीण ब्रॉडबैंड योजनाओं में Li-Fi को शामिल करती है, तो यह देश के तकनीकी विकास को नई दिशा दे सकती है।

दिल्ली-एनसीआर की स्टार्टअप वेलमेनी द्वारा विकसित Li-Fi तकनीक यह दिखाती है कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता भी बन रहा है। रोशनी के जरिए इंटरनेट चलाने का यह विचार आने वाले समय में दूरदराज के इलाकों तक तेज और सुरक्षित कनेक्टिविटी पहुंचाने में मदद कर सकता है।

अगर इस तकनीक को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह भारत के डिजिटल भविष्य को मजबूत करने के साथ-साथ दुनिया के लिए भी एक नया मॉडल बन सकती है।

1. Li-Fi तकनीक क्या है?
Li-Fi एक ऐसी तकनीक है जिसमें इंटरनेट डेटा को रेडियो वेव्स की जगह लाइट के जरिए ट्रांसफर किया जाता है।

2. Li-Fi और Wi-Fi में क्या अंतर है?
Wi-Fi रेडियो वेव्स पर चलता है, जबकि Li-Fi एलईडी लाइट या लेजर बीम का उपयोग करता है और ज्यादा तेज स्पीड दे सकता है।

3. क्या Li-Fi भारत में शुरू हो चुका है?
कुछ कंपनियां और स्टार्टअप इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन अभी यह बड़े स्तर पर लागू नहीं हुआ है।

4. Li-Fi का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
यह ज्यादा तेज, सुरक्षित और दूरदराज के इलाकों में उपयोगी तकनीक मानी जाती है।

5. क्या भविष्य में Wi-Fi खत्म हो जाएगा?
पूरी तरह खत्म होने की संभावना कम है, लेकिन Li-Fi भविष्य में Wi-Fi का मजबूत विकल्प बन सकता है।