नौतपा से पहले उत्तर भारत में भीषण गर्मी का कहर, दिल्ली-यूपी समेत कई राज्यों में 45 डिग्री के पार पहुंचा तापमान, अगले छह दिन राहत के आसार नहीं

नौतपा से पहले उत्तर भारत में भीषण गर्मी का कहर, दिल्ली-यूपी समेत कई राज्यों में 45 डिग्री के पार पहुंचा तापमान, अगले छह दिन राहत के आसार नहीं
May 20, 2026 at 1:14 pm

नौतपा की शुरुआत से पहले ही उत्तर भारत भीषण गर्मी की चपेट में आ गया है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। मौसम विभाग ने अगले पांच से छह दिनों तक लोगों को गर्मी से राहत मिलने की संभावना से इनकार किया है। सबसे चिंताजनक स्थिति उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की है, जहां लगातार तीसरे दिन तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे गर्म स्थानों में शामिल रहा। बढ़ती गर्मी ने जनजीवन, स्वास्थ्य व्यवस्था, बिजली खपत और कृषि क्षेत्र पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है।

उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहा है। मई का महीना अभी समाप्त भी नहीं हुआ है और तापमान कई स्थानों पर रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच चुका है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार नौतपा से पहले ही गर्म हवाओं का असर असामान्य रूप से तेज दिखाई दे रहा है।

उत्तर प्रदेश का बांदा जिला इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। यहां मंगलवार को अधिकतम तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लगातार तीसरे दिन यह क्षेत्र अत्यधिक गर्म बना रहा। इससे पहले वर्ष 2019 में यहां 48.1 डिग्री सेल्सियस और 2022 में 49 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था। इतिहास में यह तीसरी बार है जब बांदा का तापमान 48 डिग्री के पार पहुंचा है।

बांदा के बाद मध्य प्रदेश का नौगांव 47 डिग्री सेल्सियस और हरियाणा का रोहतक 46.9 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ सबसे गर्म शहरों में शामिल रहे। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रिज क्षेत्र में तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। महाराष्ट्र के अमरावती में भी तापमान 46.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।

पहाड़ी राज्यों में भी राहत की स्थिति नहीं है। आमतौर पर ठंडे माने जाने वाले इलाकों में भी पारा तेजी से बढ़ा है। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 44.6 डिग्री, जम्मू में 42 डिग्री, हिमाचल प्रदेश के ऊना में 43.4 डिग्री तथा उत्तराखंड के रूड़की और पंतनगर में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ने के कारण उत्तर भारत में शुष्क और गर्म हवाओं का प्रभाव बढ़ गया है। इस कारण लू की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। उत्तर प्रदेश के 60 से अधिक जिलों में हीटवेव को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

भारत में हर वर्ष मई-जून के दौरान नौतपा का विशेष महत्व माना जाता है। नौतपा वह अवधि होती है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है और नौ दिनों तक अत्यधिक गर्मी पड़ती है। परंपरागत रूप से इसे मानसून की तैयारी के संकेतों से भी जोड़ा जाता है। हालांकि इस वर्ष नौतपा शुरू होने से पहले ही भीषण गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन भी अत्यधिक तापमान के पीछे एक बड़ा कारण बन रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में हीटवेव की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। तापमान का लगातार बढ़ना सिर्फ मौसमी बदलाव नहीं बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत भी माना जा रहा है।

एक्यूआइ.इन की लाइव ग्लोबल तापमान रैंकिंग के अनुसार दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में भारत के शहरों का दबदबा देखने को मिला। बांदा, नौगांव, रोहतक, दिल्ली, आगरा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और वाराणसी जैसे शहर इस सूची में शामिल बताए गए।

भीषण गर्मी का सबसे बड़ा असर आम लोगों की दिनचर्या पर पड़ रहा है। दोपहर के समय सड़कें खाली नजर आने लगी हैं। स्कूलों में समय बदलने और छुट्टियों की मांग बढ़ने लगी है। कई राज्यों में निर्माण कार्य और बाहरी गतिविधियों को सीमित करने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक तेज धूप में रहने से हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, चक्कर, सिरदर्द और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

गर्मी का असर बिजली क्षेत्र पर भी दिखाई दे रहा है। एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों के बढ़ते उपयोग के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच रही है। कई राज्यों में बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है। अत्यधिक गर्मी से फसलों और पशुओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से पानी की उपलब्धता कम होने वाले क्षेत्रों में हालात चुनौतीपूर्ण बन सकते हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अधिकारियों के अनुसार अगले पांच से छह दिनों तक उत्तर भारत में तापमान में कोई बड़ी गिरावट आने की संभावना नहीं है। विभाग ने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और हीटवेव संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से भी लोगों को हल्के कपड़े पहनने, ओआरएस और पानी का सेवन बढ़ाने तथा तेज धूप से बचने की सलाह दी गई है।

इस बार गर्मी की तीव्रता कई सवाल खड़े कर रही है। आमतौर पर उत्तर भारत में तापमान बढ़ता है, लेकिन मई के मध्य में लगातार 46 से 48 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज होना सामान्य नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में तेजी से बढ़ता कंक्रीट निर्माण, हरित क्षेत्रों की कमी और पर्यावरणीय असंतुलन भी तापमान बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं।

दूसरी ओर, ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव अब सीधे महसूस होने लगा है। दुनिया के कई देशों में असामान्य तापमान रिकॉर्ड हो रहे हैं। भारत जैसे देश, जहां बड़ी आबादी खुले वातावरण में काम करती है, वहां ऐसी परिस्थितियां सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तर पर चुनौती बन सकती हैं।

यदि भविष्य में ऐसे हालात बढ़ते हैं तो शहरों को हीट एक्शन प्लान, बेहतर शहरी योजना और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अधिक गंभीर कदम उठाने होंगे।

उत्तर भारत में बढ़ती गर्मी अब सिर्फ मौसम की खबर नहीं रह गई है, बल्कि यह स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और जनजीवन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। नौतपा शुरू होने से पहले ही रिकॉर्ड तापमान ने चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक राहत की उम्मीद नहीं जताई है, ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की जरूरत है। आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है, इसलिए सतर्क रहना सबसे जरूरी है।

1. नौतपा क्या होता है?
नौतपा वह नौ दिन की अवधि होती है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है और अत्यधिक गर्मी पड़ती है।

2. बांदा का तापमान कितना दर्ज किया गया?
बांदा में 48.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

3. मौसम विभाग ने क्या चेतावनी जारी की है?
अगले पांच से छह दिनों तक भीषण गर्मी और लू जारी रहने की संभावना जताई गई है।

4. गर्मी से बचाव के लिए क्या करें?
अधिक पानी पिएं, दोपहर में बाहर जाने से बचें और हल्के कपड़े पहनें।

5. किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।