होर्मुज संकट के बीच इराक को मिला अरबों बैरल तेल भंडार, सऊदी सीमा के पास ‘काला सोना’ मिलने से बदलेगी मध्य पूर्व की तस्वीर

होर्मुज संकट के बीच इराक को मिला अरबों बैरल तेल भंडार, सऊदी सीमा के पास ‘काला सोना’ मिलने से बदलेगी मध्य पूर्व की तस्वीर
May 9, 2026 at 2:12 pm

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बने संकट के बीच इराक के लिए बड़ी आर्थिक राहत की खबर सामने आई है। इराक ने अपने नजफ प्रांत में सऊदी अरब की सीमा के करीब एक विशाल तेल भंडार की खोज की है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक यहां करीब 8.8 अरब बैरल कच्चा तेल मौजूद हो सकता है। यह खोज ऐसे समय हुई है जब ईरान-अमेरिका तनाव के कारण पूरे खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है और कई देशों की अर्थव्यवस्था दबाव में है। इस नए तेल क्षेत्र से न सिर्फ इराक की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि चीन जैसी बड़ी ऊर्जा आयातक अर्थव्यवस्थाओं को भी इसका लाभ मिल सकता है।

इराक के तेल मंत्रालय ने जानकारी दी है कि नजफ प्रांत में स्थित कुरनैन ब्लॉक में बड़े पैमाने पर तेल भंडार मिलने के संकेत मिले हैं। यह इलाका इराक और सऊदी अरब की सीमा के पास स्थित है और करीब 8,773 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। लंबे समय से इस क्षेत्र को तेल संभावनाओं वाला क्षेत्र माना जाता था, लेकिन हालिया ड्रिलिंग के बाद यहां बड़े स्तर पर कच्चे तेल के भंडार की पुष्टि हुई है।

सरकार के मुताबिक, “शम्स-11” नामक कुएं की शुरुआती ड्रिलिंग में हल्के प्रकार का कच्चा तेल मिला है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग रहती है। फिलहाल इस कुएं से करीब 3,248 बैरल प्रतिदिन उत्पादन शुरू होने की संभावना जताई गई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आगे तकनीकी विस्तार और अतिरिक्त निवेश के बाद यह उत्पादन कई गुना बढ़ सकता है।

इस परियोजना में चीन की प्रमुख ऊर्जा कंपनी सक्रिय भूमिका निभा रही है। चीन की झेनहुआ ऑयल कंपनी अपनी सहयोगी इकाइयों के माध्यम से सर्वेक्षण, ड्रिलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का कार्य कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन इस परियोजना में अतिरिक्त निवेश की तैयारी कर रहा है ताकि जल्द से जल्द बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज इराक के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। तेल निर्यात इराक की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और देश की सरकारी आय का बड़ा हिस्सा इसी पर निर्भर करता है। ऐसे में नए तेल भंडार की खोज आर्थिक संकट से जूझ रहे इराक को बड़ी राहत दे सकती है।

पिछले कुछ महीनों में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ा है। इसका सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से एशिया और यूरोप तक पहुंचता है।

इराक भी उन्हीं देशों में शामिल है जिसकी तेल आपूर्ति का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक जाता है। लेकिन क्षेत्रीय तनाव और समुद्री सुरक्षा संकट के कारण तेल निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में इराक ने लगभग 9.9 करोड़ बैरल तेल निर्यात किया था, लेकिन मार्च में यह घटकर करीब 1.86 करोड़ बैरल रह गया। इससे इराक की आय पर भी बड़ा असर पड़ा। फरवरी में तेल निर्यात से देश को लगभग 6.81 अरब डॉलर की कमाई हुई थी, जबकि मार्च में यह घटकर केवल 1.96 अरब डॉलर रह गई।

इसी संकट से निपटने के लिए इराक अब वैकल्पिक ऊर्जा और परिवहन परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। बसरा से हदीथा तक प्रस्तावित पाइपलाइन परियोजना भी इसी रणनीति का हिस्सा है। इस पाइपलाइन की क्षमता लगभग 25 लाख बैरल प्रतिदिन बताई जा रही है, जिससे इराक भविष्य में होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।

इस तेल भंडार की खोज का असर सिर्फ इराक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

भारत पर असर

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है और उसकी बड़ी ऊर्जा जरूरतें खाड़ी देशों से पूरी होती हैं। यदि इराक का उत्पादन बढ़ता है और वैश्विक बाजार में सप्लाई सुधरती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है। इसका सीधा फायदा भारत जैसे देशों को मिलेगा जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें आम लोगों की जेब पर असर डालती हैं।

चीन को फायदा

चीन दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है। इराक के नए तेल प्रोजेक्ट में चीन की भागीदारी उसके लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे चीन को भविष्य में स्थिर तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और वह पश्चिमी देशों पर अपनी ऊर्जा निर्भरता को संतुलित कर सकेगा।

वैश्विक बाजार पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इराक इस नए फील्ड से बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर देता है, तो वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता आ सकती है।

इराक के तेल मंत्रालय ने कहा है कि कुरनैन ब्लॉक में तेल की खोज देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकती है। मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती परीक्षण उत्साहजनक रहे हैं और आने वाले महीनों में अतिरिक्त सर्वेक्षण और ड्रिलिंग का कार्य तेज किया जाएगा।

चीन की झेनहुआ ऑयल कंपनी ने भी संकेत दिए हैं कि वह इस परियोजना में दीर्घकालिक निवेश करने को तैयार है। कंपनी का लक्ष्य जल्द से जल्द उत्पादन क्षमता बढ़ाकर वैश्विक बाजार तक तेल पहुंचाना है।

इराक की यह खोज ऐसे समय हुई है जब पूरी दुनिया ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव से जूझ रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान-अमेरिका तनाव और पश्चिम एशिया में अस्थिरता ने तेल बाजार को पहले ही प्रभावित कर रखा है। ऐसे माहौल में नए तेल भंडार की खोज वैश्विक ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि, केवल तेल भंडार मिलना ही पर्याप्त नहीं होता। उत्पादन शुरू करने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और निर्यात मार्ग सुरक्षित रखने जैसी कई चुनौतियां भी सामने होती हैं। इराक को अपने राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना होगा ताकि विदेशी निवेशक लंबे समय तक वहां काम कर सकें।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि चीन की बढ़ती मौजूदगी मध्य पूर्व की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकती है। चीन लगातार ऊर्जा संसाधनों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है और इराक में उसकी सक्रियता उसी दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

नजफ प्रांत में मिले विशाल तेल भंडार ने इराक को आर्थिक संकट के दौर में नई उम्मीद दी है। होर्मुज संकट और घटते तेल निर्यात के बीच यह खोज देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि परियोजना तय समय पर आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में इराक वैश्विक ऊर्जा बाजार में और मजबूत खिलाड़ी बनकर उभर सकता है। साथ ही भारत, चीन और अन्य ऊर्जा आयातक देशों को भी इससे राहत मिलने की संभावना है।

1. इराक में नया तेल भंडार कहां मिला है?

यह तेल भंडार इराक के नजफ प्रांत में सऊदी अरब की सीमा के पास स्थित कुरनैन ब्लॉक में मिला है।

2. इस तेल भंडार में कितना तेल होने का अनुमान है?

शुरुआती अनुमान के अनुसार यहां करीब 8.8 अरब बैरल कच्चा तेल मौजूद हो सकता है।

3. इस परियोजना में कौन-सी विदेशी कंपनी शामिल है?

चीन की झेनहुआ ऑयल कंपनी इस प्रोजेक्ट में ड्रिलिंग और सर्वेक्षण का काम कर रही है।

4. होर्मुज संकट का इराक पर क्या असर पड़ेगा?

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण इराक के तेल निर्यात में भारी गिरावट आई है और उसकी आय कम हुई है।

5. भारत को इससे क्या फायदा हो सकता है?

यदि वैश्विक तेल सप्लाई बढ़ती है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है, जिससे भारत में ईंधन कीमतों पर राहत मिल सकती है।